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दधिमथी माता मंगल – राजस्थानी दोहा चौपाई में रचित भक्तिरचना

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श्रीदधिमथीमाता मंगल डॉ. रामकुमार दाधीच द्वारा राजस्थानी भाषा में रचित भक्तिरचना श्रीदधिमथीमाता मंगल पाठकों के लाभार्थ प्रकाशित की जा रही है। पाठ करने योग्य यह रचना गोठ-मांगलोद की श्री दधिमथी माता की कथा, महिमा तथा आध्यात्मिक तत्त्व विवेचन से समन्वित है। इसकी कथावस्तु का आधार श्री दधिमथी पुराण है। (adsbygoogle = window.adsbygoogle ||

Jai Ambe Jai Jai Durge जय अम्बे जय जय दुर्गे

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Devi Bhajan Lyrics: जय अम्बे जय जय दुर्गे जय अम्बे जय जय दुर्गे दयामयी कल्याण करो ... आजाओ माँ आजाओ आकर दरस दिखा जाओ ... जय अम्बे ... कब के द्वार तिहारे ठाड़े मैया मेरी मुझ पर कृपा करो। जय अम्बे ... तेरे दरस के प्यासे नैना दरस हमें दिखला जाओ। जय अम्बे ... (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); Jai Ambe Jai Jai Durge Jai Ambe

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