Chamunda Mata Mehrangarh Fort Jodhpur | मेहरानगढ़ की चामुण्डामाता तथा किले व जसवंत थड़ा की यात्रा

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Chamunda Mata Mehrangarh Fort Jodhpur Rajasthan:  बीसहथ माता के दर्शन करने के पश्चात् हम (मैं और मेरे पिताजी) मेहरानगढ़ पहुंचे। जोधपुर आने के बाद यदि मेहरानगढ़ नहीं देखा जाता और इस गढ़ में स्थित प्रसिद्ध चामुण्डामाता के दर्शन ना किये जाते तो इस कुलदेवीधाम-यात्रा अभियान में कमी रह जाती तथा जोधपुर का पर्यटन अधूरा रह जाता। शाप, बलिदान … Read more

गुडगाँव की शीतला माता की अद्भुत कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ गुडगाँव की शीतला माता इतिहास Sheetla Mata Gurgaon Katha Itihas Hindi : हरियाणा के गुडगाँव नगर में शीतलामाता का इतिहासप्रसिद्ध मन्दिर है। शीतलामाता की अनेक समाजों में कुलदेवी के रूप में मान्यता है। श्रद्धालु जन बच्चों के मुण्डन तथा नवविवाहित जोड़े की जात के लिए गुडगाँव की शीतलामाता के दरबार में जाते हैं। मन्दिर … Read more

अग्रोहा महालक्ष्मी माता की अद्भुत कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ अग्रोहा की महालक्ष्मी माता इतिहास हरियाणा में अग्रोहा नामक स्थान पर महालक्ष्मीमाता भव्य मन्दिर है। अग्रोहा पुरातात्त्विक महत्त्व वाला प्राचीन सभ्यता केन्द्र है जहाँ अनेक पुरावशेष उपलब्ध हुए हैं। पुरातात्त्विक अनुसन्धान से पता चला है कि वहाँ पहले एक नगर था जो सरस्वती नदी के किनारे बसा था। उसका नाम प्रतापनगर था और वह … Read more

कैलामाता की अद्भुत कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

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‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ करौली की कैलामाता इतिहास Kaila Mata Karauli Katha Itihas : कैलामाता का शक्तिपीठ राजस्थान में करौली से लगभग 25 कि.मी. की दूरी पर त्रिकूट पर्वत की सुरम्य घाटी में स्थित है। कैलामाता को करौलीमाता भी कहा जाता है। कैलामाता करौली के यदुवंशी राजपरिवार में कुलदेवी के रूप में पूजित हैं। महामाया महालक्ष्मी का स्वरूप होने … Read more

ये है चौथ माता का सबसे बड़ा मंदिर : चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर

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Chauth Mata Temple Chauth Ka Barwara Sawai Madhopur : चौथमाता का मन्दिर बरवाड़ा गाँव में एक विशाल और ऊँची पहाड़ी पर स्थित है । जयपुर सवाईमाधोपुर रेलमार्ग पर चौथ का बरवाड़ा एक रेलवे स्टेशन है जिसका नामकरण चौथमाता के मन्दिर के आधार पर हुआ । देवी मन्दिर तक पहुँचने के लिए लगभग 600 सीढियाँ बनी हैं … Read more

हिंगलाजमाता की अद्भुत कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

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‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ हिंगुलालय की हिंगलाजमाता इतिहास भारतीय संस्कृति में 53 शक्तिपीठों की मान्यता है। उनमें हिङ्गुलालय का सर्वप्रथम स्थान है। शक्तिपीठों की मान्यता भगवती सती की कथा पर आधारित है। उन्होंने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में भगवान् शिव के लिए यज्ञभाग अर्पित न होने से रुष्ट होकर प्राण त्याग दिये थे। भगवान् शिव दक्ष … Read more

सुन्धामाता की अद्भुत कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ सुन्धापर्वत की सुन्धामाता इतिहास राजस्थान के जालौर जिले की भीनमाल तहसील में जसवन्तपुरा से 12 कि.मी. दूर, दांतलावास गाँव के पास सुन्धानामक पहाड़ है। इसे संस्कृतसाहित्य में सौगन्धिक पर्वत, सुगन्धाद्रि, सुगन्धगिरि आदि नामों से कहा गया है। सुन्धापर्वत के शिखर पर स्थित चामुण्डामाता को पर्वतशिखर के नाम से सुन्धामाता ही कहा जाता है। ऐतिहासिक तथ्यों के … Read more

सच्चियाय माता की श्लोकमय कथा, इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

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‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ ओसियां की सच्चियाय माता इतिहास सच्चियाय माता संचाय, सच्चिका, सचवाय, सूच्याय, सचिया आदि अनेक नामों से प्रसिद्ध है। इनका शक्तिपीठ जोधपुर से लगभग 60 कि.मी. दूर ओसियाँ में स्थित है। ओसियाँ पुरातात्त्विक महत्त्व का एक प्राचीन नगर है। जैन साहित्य में ओसियाँ नगर का उपकेश, ऊकेश, ओएश आदि नामों से उल्लेख मिलता है। ओसियाँ … Read more

दधिमथी माता का इतिहास व कथा – कुलदेवीकथामाहात्म्य

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‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ गोठ-मांगलोद की दधिमथी माता इतिहास दधिमथी माता का आदि शक्तिपीठ राजस्थान के नागौर जिले की जायल तहसील में है। यह नागौर से लगभग 40 कि.मी. दूर तथा जायल से 10 कि.मी. दूर गोठ और मांगलोद गाँवों के बीच स्थित है। मन्दिर सड़कमार्ग से जुड़ा है। इतिहासकार गौरीशंकर हीराचन्द ओझा के अनुसार इस मन्दिर के … Read more

जीणमाता की श्लोकमय कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

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‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ जीणमाता इतिहास जीणमाता का शक्तिपीठ राजस्थान के सीकर शहर से दक्षिण-पूर्व कोण में गोरियाँ रेलवे स्टेशन व बस-स्टैण्ड से 16 कि.मी. दूर एक ओरण पर्वत में स्थित है। शक्तिपीठ उत्तर, पश्चिम और दक्षिण तीन ओर से अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है। इसका मुख्य प्रवेशद्वार पूर्व दिशा में है। निज मन्दिर पश्चिमाभिमुख है। इतिहासकारों … Read more

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