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श्री लिखासन माता दर्शन, आरती व इतिहास

Likhasan Mata

Likhasan Mata Temple Nagaur : लिकासंण माता का मन्दिर नागौर जिले के लिकासंण गांव में है। यह स्थान नागौर से 75 कि.मी. डीडवाना से 18 कि.मी. तथा छोटी खाटू से 5 कि.मी. दूर है। लिकासन माता का ट्रस्ट – कुलस्वामिनी श्रीलिकासंणमाता ट्रस्ट, नाशिक के नाम से बना हुआ है। माता का मन्दिर एक हजार वर्ष से भी पुराना बताया जाता है। अभी इसका जीर्णोद्धार हुआ है। यह माहेश्वरी समाज में धूत, काहल्या, खीँवसरा, दहाड़, लखोटिया और गिलड़ा की कुलदेवी है।

माताजी का यह मन्दिर स्वयंभू देवस्थान है | बहुत से भक्तों को पर्चे भी मिलते है | मंदिर का निर्माण एक हजार साल पुराना बताया जाता है | माताजी की मूर्ती माँ दुर्गा स्वरुप है | मुस्लिम बादशाहों के आक्रमण में आज तक पाँच मुर्तिया खंडित हुई है | मूर्ती की प्रतिस्थापना सन 1438 में वहाँ के नाथजी ने की थी। मन्दिर अत्यंत जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हो जाने के बाद वर्तमान में माताजी के उपासकों ने मंदिर का नवनिर्माण कर उसमें देवी की प्रतिस्थापना की है।

Likhasan Mata Temple
Foot-Print Likhasan Mata
Lion Idol in front of Likhasan Mata Temple
Inscriptions and Idols in Likhasan Mata Temple

 

माताजी के क्षेत्रपाल –

माताजी के क्षेत्रपाल मंडोर के काला गोरा भैरव हैं। हर साल दो बार इनकी पूजा होती है।
पहली पूजा – माघ सुद चतुर्दशी को होती है | पूजा सामग्री – तिली और वाकला ( मकी या गेहू के )।
दूसरी पूजा – बैशाख सुद चतुर्दशी को होती है | उस दिन बाटी और चूरमा का चढ़ावा होता है।

|| श्री लिखासन माताजी की आरती ||

जय लिखासन माता , जय लिखासन माता |
तुमको निशदिन ध्यावत हरी ब्रम्हा शिवरी  ||१||

मांग सिंदूर विराजत, टिको मृग मद को |
उज्जवल से दोऊ नैना, चन्द्रवदन नीको ||२||

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै |
रत्न पुष्प गल मल, कंठन पर साजै ||३||

केहरि वाहन राजत, खडग खप्पर धारी |
सुर – नर मुनी – जन सेवत , तिनके दु:खहारी ||४||

कानन कुण्डल शोभित, नासागज मोती |
कोटिक चंद्र दिवाकर , सम राजत ज्योति ||५||

शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती |
धूम्र विलोचन नयना, निशदिन मदमाशी ||६||

चण्ड – मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे |
मधु – कैटम दोऊ मारे, सुर भयहीन करे ||७||

ब्रहाणी रुद्रानी, तुम कमला रानी |
आगम – निगम – बखानी, तुम शिव पटरानी ||८||

चौसठ योगिनी गावत, नुत्य करत भेरुं |
बाजत ताल मुदंगा, अरु बाजत डमरू ||९||

तुम हो जगत की माता, तुम ही हो हरता |
भक्तन के दु:खहर्ता, सुख सम्पति करता ||१०||

भुजा अष्ट अति शोभित, वर मुद्रा धारी |
मनवांछित फल पावत, सेवत – नरनारी ||११||

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती |
श्रीमाल केतु में राजत कोटि रतन ज्योति ||१२||

श्री लिखासनजी की आरती, जो कोई नर गावे |
कहत शिवानंद स्वामी, सुख सम्पति पावे ||१३||

|| श्री लिखासन माताजी की अर्चना ||

हाथ जोड़ ने अर्ज करू में , मावडी (माता)|
लिखासन महारानी म्हारी आज तिरादो नावडी ||भवसागर रो पार नहीं है, पवन झकोला खावे है |
डूबत म्हारी आज नवाडी ( नैया ) तुम बिन कौन तिरावे है |
आव नाव तू अम्बे बेगी ( जल्दी ) अवारी ( आवो ) ||१||लिखासन महारानी ………. तू माँ गौरी तू माँ लक्ष्मी अम्बे आवासुर वाली |
तू माँ काली तू माँ ज्वाला, तू ही पावागढ़ वाली |
तीन लोक में जागे थारी जोत री ( ज्योति ) ||२||लिखासन महारानी ………. चलता सिंग ( शेर ) ने बस में किनो, उपर किनी असवारी |
बल से मारियो देत ( राक्षस ) मावडी मोटी थारी बलिहारी |
थारी माया रो नहीं पायो पारजी ||३||
लिखासन महारानी ……….नवरात्रि ने नवदुर्गा ने जो कोई नित ध्यान है |
रक्षा करती रहे भवानी, बेड़ो पार लगावे है |
भंवरो निस दिन धरे, तुम्हारी ध्यान जी
लिखासन महारानी म्हारी आज तिरा दो नवाडी ||४||
हाथ जोड़ ने अर्ज करू में , मावडी |

Likasan Mata Temple Map

कैसे पहुँचे ? (How to reach Likhasan Mata Temple) –

नागौर – छोटी खाटू -लिखासन
जयपुर – कुचामण – छोटी खाटू – लिखासन
सीकर -लोसल – डीडवाना – लिखासन / डीडवाना -छोटी खाटू -लिखासन
अजमेर -पुष्कर -डेगाना – छोटी खाटू -लिखासन

 

Sanjay Sharma
Sanjay Sharma is the founder and author of Mission Kuldevi inspired by his father Dr. Ramkumar Dadhich. Mission Kuldevi is trying to get information of all Kuldevi and Kuldevta of all societies on one platform.

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