You are here
Home > कुलदेवीकथामाहात्म्य

दधिमथी माता मंगल – राजस्थानी दोहा चौपाई में रचित भक्तिरचना

dadhimathi-mata-mangal-doha-chaupai

श्रीदधिमथीमाता मंगल डॉ. रामकुमार दाधीच द्वारा राजस्थानी भाषा में रचित भक्तिरचना श्रीदधिमथीमाता मंगल पाठकों के लाभार्थ प्रकाशित की जा रही है। पाठ करने योग्य यह रचना गोठ-मांगलोद की श्री दधिमथी माता की कथा, महिमा तथा आध्यात्मिक तत्त्व विवेचन से समन्वित है। इसकी कथावस्तु का आधार श्री दधिमथी पुराण है। नोट:-  दधिमथी माता मंगल प्रकाशन के सर्वाधिकार…

गुडगाँव की शीतला माता की अद्भुत कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ गुडगाँव की शीतला माता इतिहास Sheetla Mata Gurgaon Katha Itihas Hindi : हरियाणा के गुडगाँव नगर में शीतलामाता का इतिहासप्रसिद्ध मन्दिर है। शीतलामाता की अनेक समाजों में कुलदेवी के रूप में मान्यता है। श्रद्धालु जन बच्चों के मुण्डन तथा नवविवाहित जोड़े की जात के लिए गुडगाँव की शीतलामाता के दरबार में जाते हैं। मन्दिर…

अग्रोहा महालक्ष्मी माता की अद्भुत कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ अग्रोहा की महालक्ष्मी माता इतिहास हरियाणा में अग्रोहा नामक स्थान पर महालक्ष्मीमाता भव्य मन्दिर है। अग्रोहा पुरातात्त्विक महत्त्व वाला प्राचीन सभ्यता केन्द्र है जहाँ अनेक पुरावशेष उपलब्ध हुए हैं। पुरातात्त्विक अनुसन्धान से पता चला है कि वहाँ पहले एक नगर था जो सरस्वती नदी के किनारे बसा था। उसका नाम प्रतापनगर था और वह…

कैलामाता की अद्भुत कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

kaila-mata-katha-itihas

‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ करौली की कैलामाता इतिहास Kaila Mata Karauli Katha Itihas : कैलामाता का शक्तिपीठ राजस्थान में करौली से लगभग 25 कि.मी. की दूरी पर त्रिकूट पर्वत की सुरम्य घाटी में स्थित है। कैलामाता को करौलीमाता भी कहा जाता है। कैलामाता करौली के यदुवंशी राजपरिवार में कुलदेवी के रूप में पूजित हैं। महामाया महालक्ष्मी का स्वरूप होने…

हिंगलाजमाता की अद्भुत कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

hinglaj-mata-katha-mahatmya

‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ हिंगुलालय की हिंगलाजमाता इतिहास भारतीय संस्कृति में 53 शक्तिपीठों की मान्यता है। उनमें हिङ्गुलालय का सर्वप्रथम स्थान है। शक्तिपीठों की मान्यता भगवती सती की कथा पर आधारित है। उन्होंने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में भगवान् शिव के लिए यज्ञभाग अर्पित न होने से रुष्ट होकर प्राण त्याग दिये थे। भगवान् शिव दक्ष…

सुन्धामाता की अद्भुत कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

sundha-mata-image

‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ सुन्धापर्वत की सुन्धामाता इतिहास राजस्थान के जालौर जिले की भीनमाल तहसील में जसवन्तपुरा से 12 कि.मी. दूर, दांतलावास गाँव के पास सुन्धानामक पहाड़ है। इसे संस्कृतसाहित्य में सौगन्धिक पर्वत, सुगन्धाद्रि, सुगन्धगिरि आदि नामों से कहा गया है। सुन्धापर्वत के शिखर पर स्थित चामुण्डामाता को पर्वतशिखर के नाम से सुन्धामाता ही कहा जाता है। ऐतिहासिक…

सच्चियाय माता की श्लोकमय कथा, इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

sachiya-mata-katha-mahatmya

‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ ओसियां की सच्चियाय माता इतिहास …सच्चियाय माता संचाय, सच्चिका, सचवाय, सूच्याय, सचिया आदि अनेक नामों से प्रसिद्ध है। इनका शक्तिपीठ जोधपुर से लगभग 60 कि.मी. दूर ओसियाँ में स्थित है। ओसियाँ पुरातात्त्विक महत्त्व का एक प्राचीन नगर है। जैन साहित्य में ओसियाँ नगर का उपकेश, ऊकेश, ओएश आदि नामों से उल्लेख मिलता है। ओसियाँ…

दधिमथी माता का इतिहास व कथा – कुलदेवीकथामाहात्म्य

dadhimathi-mata-katha-mahatmya

‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ गोठ-मांगलोद की दधिमथी माता इतिहास दधिमथी माता का आदि शक्तिपीठ राजस्थान के नागौर जिले की जायल तहसील में है। यह नागौर से लगभग 40 कि.मी. दूर तथा जायल से 10 कि.मी. दूर गोठ और मांगलोद गाँवों के बीच स्थित है। मन्दिर सड़कमार्ग से जुड़ा है। इतिहासकार गौरीशंकर हीराचन्द ओझा के अनुसार इस मन्दिर के…

जीणमाता की श्लोकमय कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

jeen-mata-katha-mahatmya-sanskrit-shlok

‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’ जीणमाता इतिहास जीणमाता का शक्तिपीठ राजस्थान के सीकर शहर से दक्षिण-पूर्व कोण में गोरियाँ रेलवे स्टेशन व बस-स्टैण्ड से 16 कि.मी. दूर एक ओरण पर्वत में स्थित है। शक्तिपीठ उत्तर, पश्चिम और दक्षिण तीन ओर से अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है। इसका मुख्य प्रवेशद्वार पूर्व दिशा में है। निज मन्दिर पश्चिमाभिमुख है। इतिहासकारों…

करणीमाता की श्लोकमय कथा व इतिहास – कुलदेवीकथामाहात्म्य

karni-mata-katha-mahatmya

‘कुलदेवीकथामाहात्म्य’  देशनोक की करणीमाता  इतिहास करणीमाता का मन्दिर करणीमाता का मन्दिर राजस्थान के बीकानेर शहर से लगभग 33 कि.मी. दूर देशनोक में स्थित है। बीकानेर-जोधपुर रेलमार्ग पर यह छोटा रेलवे स्टेशन है। देश-विदेश के असंख्य श्रद्धालु करणीमाता के दर्शन कर मनोवाञ्छित फल पाने के लिए देशनोक आते हैं। करणीमाता बीकानेर के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी…

Top