You are here
Home > कुलदेवी परिचय – उत्पत्ति, स्वरूप व महत्त्व

महाकवि ईसरदास कृत ‘देवियांण’ हिन्दी अर्थ सहित

deviyan-isardas-ji

कवि श्री ईसरदासकृत ‘देवियांण’ का परिचय – शक्तितत्त्व के अनुसंधानकर्ता जिज्ञासुओं तथा साधकों के लिए ’देवियांण’ अनुपम स्तोत्ररत्न है। भावुक भक्त की भक्ति एवं प्रपत्ति की अभिव्यंजना के साथ-साथ ज्ञानात्मक  सूक्ष्मविचार व तत्त्वनिरूपण से युक्त स्तोत्रों में यह महत्त्वपूर्ण है। यह एकशक्तिवाद या एकतत्त्ववाद का प्रतिपादक स्तोत्रकाव्य है। इसके सिद्धान्तानुसार एकमात्र शक्तितत्त्व के अतिरिक्त कोई सत्ता…

श्री कुलदेवी पूजन विधि – ध्यानम्, आवाहनम्, षोडश उपचार

kuldevi-pujan-vidhi

Kuldevi Pujan Vidhi : इस लेख में आपको बताया जा रहा है कि कुलदेवी माँ का पूजन किस प्रकार किया जाना चाहिये। अपनी कुलदेवी मंगल के पाठ से पहले भी षोडश उपचार से कुलदेवी पूजन करना चाहिये। पूजन के लिए पूर्वाभिमुख होकर आचमन, पवित्रीकरण, मार्जन, प्राणायाम कर संकल्प करें। स्वस्तिवाचन आदि के बाद कुलदेवी की…

कुलदेवियों के नामकरण के आधार व नामों में विविधता का कारण

kuldevi-naming-basis-and-differences-in-names

Kuldevi Naming Basis and Differences in Names in Hindi : पिछले लेख में कुलदेवी और कुलदेवता से सम्बंधित भ्रम का निवारण किया गया था जिसका विषय “कुलदेवी का स्वरुप : क्या कुलदेवी और कुलदेवता अलग-अलग हैं ?” था। प्रस्तुत लेख में हम कुलदेवियों के नामकरण के विभिन्न आधारों के बारे में जानेंगे कि अधिकांश कुलदेवियों…

कुलदेवी का स्वरूप : क्या कुलदेवी और कुलदेवता अलग-अलग हैं ?

kuldevi-ka-swarup

Kuldevi ka Swarup in Hindi : पिछले लेख में हमने मरुधरा व मारवाड़ी समाज में कुलदेवियों के विषय पर अध्ययन किया था। जिसमें कुलदेवियों की मुख्य उपासना स्थली : मरुधरा के बारे में बताया गया था। प्रस्तुत लेख में लोगों के कुलदेवी और कुलदेवता से सम्बंधित एक भ्रम का निवारण करने का प्रयास करेंगे। सामान्यतः लोगों…

कुलदेवियों की मुख्य उपासनास्थली : मरुधरा

kuldeviyo-ki-mukhya-upasana-sthali-marudhara

Kuldeviyo ki Mukhya Upasana Sthali Marudhara : पिछले लेख में आपने कुलदेवियों का स्थानों पर आधारित नामकरण विषय पर लेख पढ़ा था। इस लेख का विषय है – कुलदेवियों की मुख्य उपासनास्थली : मरुधरा कुलदेवीविषयक शोध का एक महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि कुलदेवियों के आदि उपासना-केन्द्र अधिकांशतः मरुधरा पर ही है। अब तो भारत के…

कुलदेवियों का स्थानाश्रित नामकरण

kuldeviyo-ka-sthaan-ke-anusar-namkaran

Kuldeviyo ka Sthaan ke Anusar Naamkaran : पिछली पोस्ट में आपने कुलदेवी की अवधारणा का दार्शनिक आधार विषय पर लेख पढ़ा। इस लेख में आप जानेंगे – कुलदेवियों का स्थानाश्रित नामकरण। भगवती जगदम्बा अपनी संतान की रक्षा के लिए अपने विभिन्न कलावतारों के रूप में गाँव-गाँव, नगर-नगर में विराजमान है। उन गाँवों के विभिन्न कुल…

कुलदेवी की अवधारणा का दार्शनिक आधार

kuldevi-ki-avdharna-ka-darshnik-aadhar

Kuldevi ki Avdharna ka Darshanik Aadhar in Hindi : कुलदेवी की अवधारणा शाक्त दर्शन पर आधारित है। बह्वृचोपनिषद के अनुसार मूलतत्त्व देवी ही है। सब कुछ उसी से उत्पन्न हुआ है – देवी ह्येकाग्र आसीत्। सैव जगदण्डमसृजत्।  तस्या एव ब्रह्मा अजीजनत्। विष्णुरजीजनत् … रुद्रो अजीजनत् …  सर्वमजीजनत्। सैषा पराशक्तिः।  देवीभागवतपुराण के अनुसार देवी ऐश्वर्य और…

क्या उपेक्षा से नाराज होकर कुलदेवी बाधाएँ उत्पन्न करती हैं ?

who-is-kuldevi-in-hinduism

Kuldevi in Hinduism  : हिन्दू धर्म में कुलदेवी कौन है ? कुलदेवी का स्वरूप और महत्त्व क्या है ? इनकी पूजा क्यों की जानी चाहिए ? और क्यों इनकी पूजा ना होने पर परिवार अनिष्ट और विपदाओं का घर बन जाता  है? शक्ति स्वरूपा है कुलदेवी – समस्त ब्रह्माण्ड जिससे चालयमान है वह है शिव , और जो…

कुलदेवी अथवा इष्ट देवता, किसकी पूजा श्रेयस्कर है ?

kuldevi-or-ishtdevta

ईश्वरीय तत्त्व कुलदेवी / कुलदेवता  सभी धर्मों में मनुष्य अपनी आध्यात्मिक उन्नति तथा नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाव के लिए ईश्वरीय तत्त्व का सहारा लेता है। ईश्‍वर के सर्व तत्त्वों में परिवार के कुलदेवता ही परिवारजनों के निकटतम तथा परिवार के सदस्यों की आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यधिक सुलभ होते हैं । अध्यात्म शास्त्र के अनुसार हमारा जन्म उसी…

जिन्हें कुलदेवी की जानकारी नहीं है उनके लिए पूजा विधि

puja-vidhi

हिन्दू समाज में कुलदेवियों का विशिष्ट स्थान है।  प्रत्येक हिन्दू वंश व कुल में कुलदेवी अथवा कुलदेवता की पूजा की परंपरा रही है।  यह परंपरा हमारे पूर्वज ऋषि मुनियों द्वारा प्रारम्भ की गई थी जिसका उद्देश्य वंश कुल की रक्षा के लिए सुरक्षा चक्र का निर्माण था, जो वंश को नकारात्मक शक्तियों से बचाकर उन्नति की ओर अग्रसर कर सके।…

Top