पाली माता मन्दिर: पापड़दा / नांगल – दौसा Pali / Pyali Mata Temple Nangal Dausa

Pali / Pyali Mata Nangal Lalsot Dausa
Pali / Pyali Mata Nangal Lalsot Dausa

पाली माता / प्याली माता (Pali / Pyali) मन्दिर राजस्थान के दौसा जिले में लालसोट (Lalsot) तहसील के नांगल (Nangal) कस्बे में स्थित है। मन्दिर भव्य तथा कलात्मक है। गर्भ गृह में माताजी की प्राचीन प्रतिमा के साथ सिंहवाहिनी दुर्गा की प्रतिमा प्रतिष्ठापित है। माताजी की प्रतिमा यहाँ पास ही के पापड़दा (Paparda) नामक गाँव से लाई गई है। यह मीणा समाज में बैफलावत गोत्र की कुलदेवी है।  इस माता का मूल स्थान दौसा से लालसोट रोड के बागीस मोड से 13 किलोमीटर पूर्व में पापड़दा ग्राम में है। माता की स्थापना का समय लगभग 1000 वर्ष पूर्व बताया जाता है किंतु इसका कोई ऐतिहासिक आलेख नहीं मिलता।

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डॉ रघुनाथ प्रसाद तिवारी ने अपनी पुस्तक ‘मीणा समाज कुलदेवियाँ’ में पाली माता का वर्णन इस प्रकार किया है “पाली माता का स्वरुप पौराणिक है। माता के विग्रह के चारों हाथों में डमरु, खप्पर, त्रिशूल व खड्ग है जो चंडी का स्वरूप दर्शाते हैं। पौराणिक आख्यान के अनुसार शुंभ निशुंभ के वध के लिए देवताओं ने अपनी शक्ति से एक कन्या की सृष्टि की जो दुर्गा के रूप में अवतीर्ण हुई। दुर्गा का वह रूप जो महिषासुर को मारने के लिए देवी ने धारण किया था। मार्कंडेय पुराण में यह कथा विस्तार से दी गई है। इसके पाठ का नवरात्रों में विशेष महत्व है। इस कथा को दुर्गा सप्तशती भी कहते हैं। जिसमें 700 श्लोक हैं।

वर्तमान में माता के बलि देने की प्रथा समाप्त हो गई। पूर्व में भैंसे की बलि दी जाती थी जो महिषासुर का प्रतीक था। ग्राम निवासियों के सहयोग से मंदिर का नव निर्माण कार्य चल रहा है इसके पूर्व पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार बैक रावत गोत्र के मीणाओं द्वारा कराया गया था। माता के सात्त्विक भोग लगता है। यह माता बैफलावत मीणाओं की कुलदेवी है।

Pali / Pyali Mata Temple Nangal Lalsot Dausa
Pali / Pyali Mata Temple Nangal Lalsot Dausa
Bhairav in Pali / Pyali Mata Nangal Lalsot Dausa
Bhairav in Pali / Pyali Mata Nangal Lalsot Dausa

रावत सारस्वत ने बैफलावत वंश के संबंध में लिखा है कि इस वंश की उत्पत्ति चंद्रवंशी तंवर क्षत्रियों से है जिनमें अनंगपाल प्रथम के पुत्र आदि तिजारा आये। इनका निकास दिल्ली हस्तिनापुर से है। अनंगपाल की तीसरी पीढ़ी में खाटू राव हुए और उसका पोता पापड़दो हुआ (संभवतः उसी के नाम से माता का नाम पाले या पाली माता पड़ा हो) जिसे पाली माता ने प्रसन्न होकर 750 घोड़े दिए थे। खाटू राव का राज्यकाल संवत 992 बताया जाता है।

 Languriya Bhairav in Pali / Pyali Mata Nangal Lalsot Dausa
Languriya Bhairav in Pali / Pyali Mata Nangal Lalsot Dausa

नोट:-   यदि आप भी पपलाज माता को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं तो Comment Box में अपना समाज व गोत्र लिखें। 

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