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स्वांगिया माता गजरूप सागर मन्दिर

         Gajrup Sagar Temple Aavad Mata History in Hindi : जैसलमेर से 4 कि.मी. पूर्व की तरफ गजरूप सागर तालाब के पास समतल पहाड़ी पर देवी स्वांगियां का मन्दिर बना हुआ है। इसका निर्माण संवत् 1895 में महारावल गजसिंह ने करवाया था। वे प्रातः उठते ही अपने किले से देवी के दर्शन किया करते थे।

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Avad Mata / Swangiya Mata Temple Gajrup Sagar

 इतिहास प्रसिद्ध विजयराव चुड़ाले पर देवी स्वांगियां की कृपा

          विजयराव भाटी का नाम इतिहास में विजयराव चुड़ाले के नाम से प्रख्यात है। विजयराव देवी स्वांगियां का बड़ा भक्त था।  सिन्ध के मुसलमानों ने उस पर आक्रमण किया। उस समय विजयराव ने देवी का स्मरण कर प्रतिज्ञा की कि यदि वह युद्ध में विजयी होगा तो अपना मस्तक देवी को अर्पण कर देगा। युद्ध में स्वयं देवी ने आकर उसकी सहायता की और विजयराव की विजय पताका लहराई। विजय पाने के बाद वह देवी के मंदिर पहुँचा और मस्तक देवी को अर्पण करने के लिए तलवार गर्दन पर रखी। तब देवी प्रकट होकर बोली कि “मैंने तेरी पूजा स्वीकार की। ” परन्तु विजयराव को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ। तब देवी ने अपने हाथ से सोने की चूड़ उतारकर विजयराव के हाथ में पहना दी और कहा कि “अब तू अपने घर लौट जा। तेरे वंशजों का प्रताप दिन प्रतिदिन बढ़ता जाएगा।” इस चूड़ के कारण वह विजयराव चुड़ाले के नाम से विख्यात हुआ व उसके वंशजों ने यवनों से विजय पाई और अविकल रूप से राज किया।

         समय समय पर देवी भगवती ने ऐसे चमत्कार दिखाए जिनसे उनके प्रति लोगों की आस्था बढ़ती चली गयी।

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