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नवरात्रि का महत्त्व व इतिहास | Significance & History of Navratri – 9 Day Indian Festival

Significance & History of Navratri in Hindi : नवरात्रि देवी दुर्गा माता को समर्पित एक पवित्र, शुभ व मंगलकारी  हिन्दू पर्व है। नौ दिनों का यह त्यौहार देवी दुर्गा के प्रति भक्ति – आराधना, मनोरंजन से भरपूर डांडिया नृत्य, अलग-अलग तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों से परिपूरित है। इन नौ दिनों में भक्त दुर्गा माता के नौ रूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायनी, कालरात्रि, महा गौरी और सिद्धिदात्री की क्रमशः पूजा करते हैं। यद्यपि नवरात्रि नौ दिनों का त्यौहार है परंतु इस बार 2016 में यह 10 दिनों 1 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक मनाया जायेगा।

Significance

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नवरात्रि का अर्थ –

नवरात्रि में पहला शब्द ‘नव’ का अर्थ है ‘ नौ ‘ तथा रात्रि का अर्थ है ‘ रात ‘ , अर्थात नौ रातों तक मनाया जाने वाला उत्सव। इस उत्सव को ‘ दुर्गा पूजा ‘ के नाम से भी जाना जाता है। यद्यपि यह सम्पूर्ण भारतवर्ष का त्यौहार है लेकिन गुजरात व बंगाल में नवरात्रि का भव्य समारोह होता है। नवरात्रि के अंतिम दिन दशहरा मनाया जाता है।  इसे विजयादशमी भी कहा जाता है।  नवरात्रि के इन शुभ दिनों में दुर्गा के रूप में शक्ति (Power) की पूजा की जाती है।

यह भी पढ़ें –  क्यों मनाई जाती है नवरात्रि और क्या है नवरात्रि की पूजा विधि 

घटस्थापना –

घटस्थापना या कलशस्थापना पूजा नवरात्रि के मुख्य रिवाजों में से एक है।  घटस्थापना नवरात्रि के नौ दिनों की शुरुआत का प्रतीक है। कलशस्थापना पूजा के द्वारा देवी शक्ति का आह्वान किया जाता है। इस पूजा के अन्तर्गत एक कलश में जौ के बीज बोये जाते हैं।  यह पूजा अमावस्या के बाद प्रतिपदा को अर्थात नवरात्रि के प्रथम दिन की जाती है।

कन्या पूजन –

देश के कुछ स्थानों पर नवरात्रि के दौरान कन्या पूजा की जाती है। इसमें नौ बालिकाओं को देवी दुर्गा के नौ अवतार मानकर उनकी पूजा की जाती है। इस पूजा में कन्याओं के पैरों को धोया जाता है और उन्हें उपहार दिए जाते हैं। देवी को समर्पित पर्व होने के कारण नवरात्रि के दिनों में कुछ समुदायों में महिलाओं की पूजा की जाती है।

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दशहरा या विजयादशमी –

नवरात्रि के अंतिम दिन को दशहरा या विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है।  यह दिन राम की रावण पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इस प्रकार यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस दिन देश भर में रावण के पुतले जलाये जाते हैं। इस दिन लोग शस्त्र पूजा भी करते हैं क्योंकि शस्त्र शक्ति के चिह्न हैं।

महिषासुर का अंत –

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब महिषासुर नामक एक दैत्य ने अपने आतंक से तीनों लोकों को त्रस्त कर रखा था। सभी देवता मिलकर भगवान शिव के पास गए और उनसे महिषासुर के आतंक का अंत करने की प्रार्थना की।  तब भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा की शक्तियों ने मिलकर देवी दुर्गा की रचना की जानिए कैसे पड़ा माता शक्ति का नाम दुर्गा ? जिसे देवताओं ने भी अपने अस्त्र-शस्त्र प्रदान किये। जानिये कैसे प्रकट हुई महादुर्गा, कैसे मिले देवी को अस्त्र-शस्त्र।  देवी दुर्गा की सुंदरता देखकर महिषासुर उन पर मोहित हो गया।  वह देवी दुर्गा से विवाह करना चाहता था। माँ दुर्गा ने उसके सामने शर्त रखी की यदि वह देवी दुर्गा को युद्ध में परास्त कर देगा तो वह उससे विवाह कर लेगी। महिषासुर और देवी दुर्गा के बीच युद्ध शुरू हुआ जो नौ रातों तक चला और अंत में देवी ने उसका प्राणान्त कर दिया।

Sanjay Sharma
Sanjay Sharma is the founder and author of Mission Kuldevi inspired by his father Dr. Ramkumar Dadhich. Mission Kuldevi is trying to get information of all Kuldevi and Kuldevta of all societies on one platform.

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