Chaitra Navratri 2020 : Puja Vidhi | Dates | Puja Muhurt| नवरात्रि का महत्त्व व इतिहास

Navratri 2020 puja vidhi, muhurt, dates : भारतवर्ष में चैत्र नवरात्रि पर्व का बहुत ही विशेष स्थान है क्योंकि इसी दिन से हिन्दू नववर्ष की शुरुआत होती है। 2020 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 25 मार्च से हो रही है। इसी दिन से विक्रम नवसंत्सवर 2077 की शुरुआत होगी। इसे वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता है। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस बार हिंदी नव वर्ष का राजा बुध रहेगा। क्योंकि बुधवार के दिन से ही नये साल का प्रारंभ होने जा रहा है। लेकिन इस बार की चैत्र नवरात्रि अपने आप में बहुत ही ख़ास है क्योंकि इस बार ये सभी नौ दिनों तक मनाई जाएगी।

वर्षों बाद बना है ऐसा संयोग :

आम तौर पर जो नवरात्रि आती है वो तिथियों के अनुसार अष्टमी तक ही मनाई जाती है लेकिन इस बार नवरात्रि का सालों बाद ऐसा संयोग बना है कि इस बार नवरात्रि नवमी तक यानि पूरे नौ दिनों तक मनाई जाएगी। माना जा रहा है कि इसके अलावा और भी कई शुभ संयोग इस नवरात्रि को पड़ रहे हैं। इस बार चैत्र नवरात्र में 4 सर्वाथसिद्धि, 5 रवि और द्विपुष्कर योग बन रहा है।

Navratri Durga Puja Vidhi Video :

चैत्र नवरात्रि 2020 घटस्थापना मुहूर्त :

  • घटस्थापना – बुधवार, 25 मार्च 2020 को
  • घटस्थापना मुहूर्त – प्रातः 06:00 बजे से प्रातः 06:57 बजे तक
  • अवधि – 00 घण्टे 56 मिनट्स
  • प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – 24 मार्च 2020 को दोपहर 02:57 बजे
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त – 25 मार्च 2020 को सायं 05:26 बजे
  • मीन लग्न प्रारम्भ – 25 मार्च 2020 को प्रातः 06:00 बजे
  • मीन लग्न समाप्त – 25 मार्च 2020 को प्रातः 06:57 बजे
  • घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर है।
  • घटस्थापना मुहूर्त, द्वि-स्वभाव मीन लग्न के दौरान है।

Navratri 2020 Dates

  • 25 मार्च 2020 : नवरात्रि के पहले दिन देवी शैलपुत्री की पूजा होती है।
  • 26 मार्च 2020 : नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है।
  • 27 मार्च 2020 : माता की तीसरी शक्ति के रूप में माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।
  • 28 मार्च 2020 : चौथे दिन मां दुर्गा के स्वरूप देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है.।
  • 29 मार्च 2020 : नवरात्रि के पांचवें दिन देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है।
  • 30 मार्च 2020 : नवरात्रि के दिन माता के छठे स्वरूप देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है।
  • 31 मार्च 2020 : नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है।
  • 01 अप्रैल 2020 : नवरात्रि के आठवें दिन देवी महागौरी की पूजा की जाती है।
  • 02 अप्रैल 2020 : नवरात्रि के अंतिम दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

नवरात्रि : देवी के पूजन की संक्षिप्त सरल व उचित विधि

माँ जगदम्बा अपने भक्तों का कल्याण करती है।  माँ की आराधना के लिए संक्षिप्त विधि प्रस्तुत है।

सर्वप्रथम आसन पर बैठकर जल से तीन बार शुद्ध जल से आचमन करे- “ॐ केशवाय नम:, ॐ माधवाय नम:, ॐ नारायणाय नम:”

फिर हाथ में जल लेकर हाथ धो लें। हाथ में चावल एवं फूल लेकर अंजुरि बांध कर दुर्गा देवी का ध्यान करें।

आगच्छ त्वं महादेवि। स्थाने चात्र स्थिरा भव।
यावत पूजां करिष्यामि तावत त्वं सन्निधौ भव।।

‘श्री जगदम्बे दुर्गा देव्यै नम:।’ दुर्गादेवी-आवाहयामि! – फूल, चावल चढ़ाएं।
‘श्री जगदम्बे दुर्गा देव्यै नम:’ आसनार्थे पुष्पानी समर्पयामि।– भगवती को आसन दें।
श्री दुर्गादेव्यै नम: पाद्यम, अर्ध्य, आचमन, स्नानार्थ जलं समर्पयामि। – आचमन ग्रहण करें।
श्री दुर्गा देवी दुग्धं समर्पयामि – दूध चढ़ाएं।
श्री दुर्गा देवी दही समर्पयामि – दही चढा़एं।
श्री दुर्गा देवी घृत समर्पयामि – घी चढ़ाएं।
श्री दुर्गा देवी मधु समर्पयामि – शहद चढा़एं
श्री दुर्गा देवी शर्करा समर्पयामि – शक्कर चढा़एं।
श्री दुर्गा देवी पंचामृत समर्पयामि – पंचामृत चढ़ाएं।
श्री दुर्गा देवी गंधोदक समर्पयामि – गंध चढाएं।
श्री दुर्गा देवी शुद्धोदक स्नानम समर्पयामि – जल चढा़एं। आचमन के लिए जल लें,
श्री दुर्गा देवी वस्त्रम समर्पयामि – वस्त्र, उपवस्त्र चढ़ाएं।
श्री दुर्गा देवी सौभाग्य सूत्रम् समर्पयामि-सौभाग्य-सूत्र चढाएं।
श्री दुर्गा-देव्यै पुष्पमालाम समर्पयामि-फूल, फूलमाला, बिल्व पत्र, दुर्वा चढ़ाएं।
श्री दुर्गा-देव्यै नैवेद्यम निवेदयामि-इसके बाद हाथ धोकर भगवती को भोग लगाएं।
श्री दुर्गा देव्यै फलम समर्पयामि– फल चढ़ाएं।
श्री दुर्गा-देव्यै ताम्बूलं समर्पयामि -तांबुल (सुपारी, लौंग, इलायची) चढ़ाएं । मां दुर्गा देवी की आरती करें।

Significance & History of Navratri in Hindi

नवरात्रि देवी दुर्गा माता को समर्पित एक पवित्र, शुभ व मंगलकारी  हिन्दू पर्व है। नौ दिनों का यह त्यौहार देवी दुर्गा के प्रति भक्ति – आराधना, मनोरंजन से भरपूर डांडिया नृत्य, अलग-अलग तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों से परिपूरित है। इन नौ दिनों में भक्त दुर्गा माता के नौ रूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायनी, कालरात्रि, महा गौरी और सिद्धिदात्री की क्रमशः पूजा करते हैं। 

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नवरात्रि का अर्थ –

नवरात्रि में पहला शब्द ‘नव’ का अर्थ है ‘ नौ ‘ तथा रात्रि का अर्थ है ‘ रात ‘ , अर्थात नौ रातों तक मनाया जाने वाला उत्सव। इस उत्सव को ‘ दुर्गा पूजा ‘ के नाम से भी जाना जाता है। यद्यपि यह सम्पूर्ण भारतवर्ष का त्यौहार है लेकिन गुजरात व बंगाल में नवरात्रि का भव्य समारोह होता है। नवरात्रि के अंतिम दिन दशहरा मनाया जाता है।  इसे विजयादशमी भी कहा जाता है।  नवरात्रि के इन शुभ दिनों में दुर्गा के रूप में शक्ति (Power) की पूजा की जाती है।

यह भी पढ़ें –  क्यों मनाई जाती है नवरात्रि और क्या है नवरात्रि की पूजा विधि 

घटस्थापना –

घटस्थापना या कलशस्थापना पूजा नवरात्रि के मुख्य रिवाजों में से एक है।  घटस्थापना नवरात्रि के नौ दिनों की शुरुआत का प्रतीक है। कलशस्थापना पूजा के द्वारा देवी शक्ति का आह्वान किया जाता है। इस पूजा के अन्तर्गत एक कलश में जौ के बीज बोये जाते हैं।  यह पूजा अमावस्या के बाद प्रतिपदा को अर्थात नवरात्रि के प्रथम दिन की जाती है।

कन्या पूजन –

देश के कुछ स्थानों पर नवरात्रि के दौरान कन्या पूजा की जाती है। इसमें नौ बालिकाओं को देवी दुर्गा के नौ अवतार मानकर उनकी पूजा की जाती है। इस पूजा में कन्याओं के पैरों को धोया जाता है और उन्हें उपहार दिए जाते हैं। देवी को समर्पित पर्व होने के कारण नवरात्रि के दिनों में कुछ समुदायों में महिलाओं की पूजा की जाती है।

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दशहरा या विजयादशमी –

नवरात्रि के अंतिम दिन को दशहरा या विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है।  यह दिन राम की रावण पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इस प्रकार यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस दिन देश भर में रावण के पुतले जलाये जाते हैं। इस दिन लोग शस्त्र पूजा भी करते हैं क्योंकि शस्त्र शक्ति के चिह्न हैं।

महिषासुर का अंत –

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब महिषासुर नामक एक दैत्य ने अपने आतंक से तीनों लोकों को त्रस्त कर रखा था। सभी देवता मिलकर भगवान शिव के पास गए और उनसे महिषासुर के आतंक का अंत करने की प्रार्थना की।  तब भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा की शक्तियों ने मिलकर देवी दुर्गा की रचना की जानिए कैसे पड़ा माता शक्ति का नाम दुर्गा ? जिसे देवताओं ने भी अपने अस्त्र-शस्त्र प्रदान किये। जानिये कैसे प्रकट हुई महादुर्गा, कैसे मिले देवी को अस्त्र-शस्त्र।  देवी दुर्गा की सुंदरता देखकर महिषासुर उन पर मोहित हो गया।  वह देवी दुर्गा से विवाह करना चाहता था। माँ दुर्गा ने उसके सामने शर्त रखी की यदि वह देवी दुर्गा को युद्ध में परास्त कर देगा तो वह उससे विवाह कर लेगी। महिषासुर और देवी दुर्गा के बीच युद्ध शुरू हुआ जो नौ रातों तक चला और अंत में देवी ने उसका प्राणान्त कर दिया।

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