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श्री रोहिणी माता / गाजर माता मंदिर गुन्दोज : दर्शन व उपासक

Rohini Mata / Gajar Mata Temple Gundoj Pali : श्री रोहिणी माता / गाजर माता का मंदिर राजस्थान में पाली के समीप गुन्दोज ग्राम में है। यह मंदिर पूर्वामुखी है। इस मंदिर में अम्बा माता, रोहिणी माता, चामुण्डा माता की प्रतिमाएं विराजमान होने से श्रद्धालु इस मंदिर को अलग-अलग नाम से पुकारते हैं। यह मंदिर श्री रोहिणी माता के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। कुछ लोग इसे गाजर माता के नाम से भी पुकारते है।

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Rohini Mata / Gajar Mata

चैत्र कृष्णा दशमी को विशाल मेला लगता है। देश भर से माता के भक्त इस मेले में सम्मिलित होने के लिए आते हैं। यों तो सामान्य दिनों में भी श्रद्धालु माताजी के दर्शनार्थ आते रहते हैं पर नवरात्रि के दिनों में विशेष चहल-पहल होती है।

यहाँ यात्रियों के विश्राम व ठहरने हेतु कमरे बने हुए हैं। यह देवी गुन्दोज ग्राम के ठाकुर उदावत राजपूत की आराध्या देवी है।

 रोहिणी / गाजर माता को कुलदेवी के रूप में पूजने वाले समाज व गोत्र 

सं.समाजगोत्र

1.

ओसवालगुन्देशा

नोट :- यदि आप भी गोत्रानुसार श्री रोहिणी माता / गाजर माता को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं और आपका समाज – गोत्र इस लिस्ट में शामिल नहीं है, तो शामिल करने हेतु  नीचे दिए कमेण्ट बॉक्स में  विवरण आमन्त्रित है। (समाज : गोत्र )। इस Page पर कृपया इसी कुलदेवी से जुड़े विवरण लिखें।

कैसे पहुंचे ? (How to reach Rohini /Gajar Mata temple Gundoj)

Pali to Gundoj : पाली से गुन्दोज मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पाली में सुमेरपुर रोड़ से बस या टैक्सी से वहाँ आसानी से पहुंचा जा सकता है। 
Jalore to Gundoj : जालोर से जालोर-पाली राजमार्ग पर साण्डेराव होते हुए गुन्दोज जाया जा सकता है। जालोर से गुन्दोज की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है।

Rohini Mata / Gajar Mata Temple Map

Sanjay Sharma
Sanjay Sharma is the founder and author of Mission Kuldevi inspired by his father Dr. Ramkumar Dadhich. Mission Kuldevi is trying to get information of all Kuldevi and Kuldevta of all societies on one platform.

12 thoughts on “श्री रोहिणी माता / गाजर माता मंदिर गुन्दोज : दर्शन व उपासक

  1. राजपुरोहित समाज के गुन्दैचा,, व मुथा गोत्र कि कुलदेवी है,, यह पाली के पालीवाल बाहामणो से निकले हैं,,
    जिसमे,, गुन्दैचा गोत्र,, निम्बाड़ा,, मादा,, बाडवा व नोरवा में व राजस्थान के कही गाव मे,, निवास करते हैं,,
    मुथा गोत्र,, पाली जिले में,, धेनडी, रूगडी,, पिलोवणी,, वणदार, और सिवतलाब में निवास करते हैं,,
    इस मदिर के बारे में काहा जाता है,, जब मुगलों के आतक से पालीवाल बाहामणो ने पाली का त्याग कर जाते समय पहली रात यही रूके और अपनी रक्षा के लिए माताजी का याहा अनुष्ठान किया,, और यही से कुछ राजपुरोहित में मुथा गुन्दैचा व कुछ माहाजन समाज में मुथा व गुनदैशा गोत्रो में बट गए,,

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