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बहुचरा माता की कहानी, क्यों करते हैं किन्नर माँ की उपासना ?

Bahuchara Mata Temple Becharaji story in Hindi : बहुचरा माता का प्रसिद्ध मंदिर गुजरात के मेहसाणा जिले के बेचराजी नामक कस्बे में स्थित है। बहुचरा माता को बेचराजी भी कहा जाता है। इन्ही देवी के नाम पर इस कस्बे का नाम बेचराजी प्रसिद्ध हुआ। हर वर्ष यहाँ लाखो श्रद्धालु दूर-दूर से माँ के दर्शन के लिए आते हैं। जिन लोगों को संतान सुख प्राप्त नहीं होता वो विशेष तौर पर माँ के दरबार में माथा टेकने आते हैं जिनके आशीर्वाद से उनको संतान की प्राप्ति होती है। बहुचरा माता को कुलदेवी के रूप में पूजने वाले श्रद्धालु यहाँ जात-जडूले इत्यादि के लिए आते हैं।

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Bahuchara Mata

यह मंदिर ऊंचे प्राचीर से घिरे हुए एक विस्तृत आंगन के मध्य में स्थित है। मंदिर का मुख्य पीठ बालायंत्र है। देवी का वाहन मुर्गा है। श्रृंगार के बाद माँ बहुचराजी के दर्शन किए जाते हैं। यहां पाषाण या किसी धातु की मूर्ति नहीं है। मंदिर के पीछे की ओर एक वृक्ष के नीचे माता जी का मूल स्थान है। यहां एक स्तंभ और एक छोटा सा मंदिर है। मुख्य मंदिर के सामने एक अग्निकुंड भी बना हुआ है।

बहुचरा माता की कहानी

कहा जाता है माँ बहुचरा चारण जाति के बापल दान देथा की पुत्री थीं। एक बार देवी बहुचरा अपनी बहनों के साथ एक काफिले में यात्रा कर रही थीं कि बीच रास्ते में एक खूंखार डाकू बपैया ने काफिले पर हमला कर दिया। वीर चारण स्त्री – पुरुष अपनी पूरी हिम्मत से इस हमले का जवाब देने लगे लेकिन इनकी संख्या कम होने की वजह से डाकू लोग इन पर हावी होने लगे।

इस समय देवी बहुचरा अपनी बहनों के साथ आत्म बलिदान देने के लिये उठ खड़ी हुई। उन्होंने अपने स्तन काट डाले और डाकू बपैया को शाप दे दिया। शाप की वजह से डाकू नपुंसक हो गया और इस शाप से मुक्त होने के लिए उसे एक महिला की तरह सज – संवर कर और महिला के हाव भाव करके माँ को प्रसन्न करना पड़ा। इसलिए यह कहा जा सकता है कि यह किन्नर समुदाय के इस रूप का प्रारम्भ था।

आज भी देश भर में किन्नर समुदाय द्वारा माँ बहुचरा को पूजा जाता है।  गुजरात में किन्नर समुदाय के अलावा अन्य समाजो  के लोग भी माँ में असीम श्रद्धा रखते हैं।  माँ का वाहन एक मुर्गा है जो कि बेगुनाही का प्रतीक है।

क्यों करते हैं किन्नर माँ की उपासना ?

कहा जाता है कि एक निःसंतान राजा ने पुत्र प्राप्ति के लिए माँ की आराधना की। माँ के आशीर्वाद से उनको एक पुत्र की प्राप्ति तो हुई लेकिन वह नपुंसक निकला। राजकुमार का नाम जेथो रख गया।  एक रात राजकुमार के सपने में माँ बहुचरी आयीं और उनको अपना भक्त बनने का निर्देश दिया। इसके लिए उनको अपने गुप्तांगो को समर्पित करना था।  इसके बाद जितने भी लोग नपुंसक थे उन्होंने अपने गुप्तांगो की बलि देकर माँ की आराधना में अपना जीवन समर्पित करना शुरू कर दिया और माँ उनकी रक्षा और उनकी खुशियों का पूरा ख्याल रखती थीं। इस तरह से माँ बहुचरी किन्नर समुदाय की कुल देवी बन गयी।

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कैसे पहुंचे ? (How to reach Bahuchara Mata Temple?)

मंदिर अहमदाबाद से लगभग 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अहमदाबाद से गांधीनगर – मेहसाणा होते हुए बेचराजी जाया जा सकता है। मेहसाणा से यह धाम 38 किलोमीटर दूर है।

बहुचरा माता का यह मंदिर पश्चिम रेलवे के ओखा-राजकोट-मेहसाणा रेलमार्ग पर ओखा से 466 किलोमीटर दूर है। मेहसाणा से 27 किलोमीटर पहले कटोसण रोड जंक्शन स्टेशन है। इस स्टेशन से एक दूसरी रेललाइन बेचराजी (बहुचराजी) के लिए जाती है। यहां से 25 किलोमीटर की दुरी पर बहुचराजी मंदिर स्थित है।

Bahuchara Mata Temple Map –

Sanjay Sharma
Sanjay Sharma is the founder and author of Mission Kuldevi inspired by his father Dr. Ramkumar Dadhich. Mission Kuldevi is trying to get information of all Kuldevi and Kuldevta of all societies on one platform. <iframe src="https://www.facebook.com/plugins/follow.php?href=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2Fsanjay.sharma.mission.kuldevi&width=450&height=35&layout=standard&size=large&show_faces=false&appId=1715841658689475" width="450" height="35" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowTransparency="true"></iframe>

3 thoughts on “बहुचरा माता की कहानी, क्यों करते हैं किन्नर माँ की उपासना ?

  1. मारोठिया माली की कूलदेवी कोनसी है व कहां पर है ।

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