महेचा राठौड़ वंश का इतिहास व खांपें | Mahecha Rathore Vansh History in Hindi

Mahecha Rathore vansh history in hindi : सलखा राठौड़ के पुत्र मल्लीनाथ बड़े प्रसिद्ध हुए। बाढ़मेर का महेवा क्षेत्र सलखा के पिता तीड़ा के अधिकार में था। वि. सं. 1414 में मुस्लिम सेना का आक्रमण हुआ। सलखा को कैद कर लिया गया। कैद से छुटने के बाद वि. सं. 1422 में अपने श्वसुर राणा रूपसी पड़िहार की सहायता से महेवा को वापिस जीत लिया। वि. सं. 1430 में मुसलमानों का फिर आक्रमण हुआ। सलखा ने वीर गति पाई। सलखा के स्थान पर माला (मल्लिनाथ ) राज्य  हुआ। इन्होनें मुसलमानों से सिवाना का किला जीता और अपने भाई जैतमाल को दे दिया व छोटे भाई वीरम को खेड़ की जागीर दी। नगर व भिरड़गढ़ के किले भी मल्लिनाथ ने अधिकार में किये। मल्लिनाथ शक्ति संचय कर राठौड़ राज्य का विस्तार करने और हिन्दू संस्कृति की रक्षा करने पर तुले रहे। उन्होंने मुसलमान आक्रमणों को विफल कर दिया। मल्लिनाथ और उसकी रानी रूपादे, नाथ सम्प्रदाय में दीक्षित हुए और ये दोनों सिद्ध माने गए। मल्लिनाथ के जीवनकाल में ही उनके पुत्र जगमाल को गद्दी मिल गई। जगमाल भी बड़े वीर थे। गुजरात का सुलतान तीज पर इकट्ठी हुई लड़कियों को हर ले गया तब जगमाल अपने योद्धाओं के साथ गुजरात गया और गुजरात सुलतान की पुत्री गींदोली का हरण कर लिया। (मारवाड़ का इतिहास प्रथम भाग पृ. 54 ) तब राठौड़ों और मुसलमानों में युद्ध हुआ। इस युद्ध में जगमाल ने बड़ी वीरता दिखाई। कहा जाता है कि सुलतान की बीवी को तो युद्ध में जगह जगह जगमाल ही दिखाई देता था।

इस सम्बन्ध में एक दोहा प्रसिद्ध है –

“पग पग नेजा पाडियां , पग पग पाड़ी ढाल।
बीबी पूछे खान नै , जंग किता जगमाल।।”

इसी जगमाल का महेवा पर अधिकार था। इस कारण इनके वंशज महेचा कहलाते है।

       जोधपुर परगने में थोब, देहुरिया, पादरडी, नोहरो आदि इनके ठिकाने थे। (मारवाड़ रा विगत भाग तृतीय पृ. 473) उदयपुर रियासत में नीबड़ी व केलवा इनकी जागीर में थे। (राजपूताते का इतिहास-गहलोत पृ. 347 ) महेवा राठौड़ों की निम्न खांपें है।

1. ) पातावत महेचा :-

जगमाल के पुत्र रावल मण्डलीक बाद क्रमशः भोजराज, बीदा, नीसल, हापा, मेघराज व पताजी हुए। इन्हीं पता के वंशज पातावत महेचा हैं।

2. ) कालावत महेचा :-

मेघराज के पुत्र कल्ला के वंशज।

3. ) दूतावत महेचा :-

मेघराज के पुत्र दूदा के वंशज।

4. ) उगा :-

वरसिंह के पुत्र उगा के वंशज।

महेचा राठौड़ वंश की कुलदेवी :-

मूल राठौड़ वंश होने से इस वंश की कुलदेवी पंखिनी/नागणेचिया माता है। नागणेचिया माता के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए Click करें >

यदि आप महेचा राठौड़ वंश से हैं और नागणेचिया माता से इतर किसी देवी को कुलदेवी के रूप में पूजते हैं तो कृपया Comment Box में बताएं। अथवा इस वंश से जुड़ी कोई जानकारी देना चाहते हैं तो भी आप Comment Box में अपने सुझाव व विचार दे सकते हैं।

1 thought on “महेचा राठौड़ वंश का इतिहास व खांपें | Mahecha Rathore Vansh History in Hindi”

Leave a Comment

This site is protected by wp-copyrightpro.com