Narayani Mata Temple Alwar

नारायणी माता (Narayani Mata) का मन्दिर भारतवर्ष में सैन समाज (Sain Samaj) से जुड़ा एकमात्र मन्दिर है। सती नारायणी माता सैन समाज की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती है। नारायणी माता का मंदिर राजस्थान के अलवर जिले में अमनबाग (Amanbagh) से 14 K.M. दूर सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान (Sariska National Park) के किनारे पर स्थित … Read more

Sarsa Mata Temple, Gola Ka Bas, Rajgarh Alwar

Sarsa Mata Mandir Darshan Video : कृपया हमारा Youtube Channel ‘Devika TV – Devotional India’ को Subscribe करें सरसामाता (Sarsa Mata) प्राचीन और प्रसिद्ध मन्दिर अलवर जिले (Alwar District) में गोला का बास (Gola Ka Bas)से टहलाँ (Tahla) जाने वाले सड़क मार्ग पर स्थित है । दौसा (Dausa- Rajasthan) से यह लगभग 30 कि.मी. दूर है । … Read more

Bhandan Mata Bhandarej Dausa

दौसा (Dausa) से लगभग 9-10 कि.मी पूर्व में स्थित भाण्डारेज (Bhandarej) पुरातात्विक (Archiological) महत्त्व का एक प्राचीन कस्बा है जिसका महाभारत कालीन भद्रावती नगर (Bhadrawati Nagar) से तादात्म्य (Identification) किया जाता है । यहाँ पर प्राचीन गढ़ और विशाल बावड़ियों (Stepwells) के अलावा भण्डानमाता (Bhandan Mata) का प्राचीन मन्दिर है जो वर्तमान में भग्न (Fractal) … Read more

Dholagarh Devi Temple Alwar

अलवर जिले (Alwar District) में कठूमर (Kathumar) पंचायत समिति में लक्ष्मणगढ़ (Laxmangarh) से लगभग 10 कि.मी. पहले बहतूकला गाँव में एक ऊँचे और विशाल पर्वत शिखर पर धोलागढ़ देवी (Dholagarh Devi) का भव्य मन्दिर स्थित है । देवी का यह प्राचीन मन्दिर जिस पर्वत पर स्थित है वह धोलगिरी (Dholgiri) कहलाता है तथा संभवतः इस … Read more

The Power of Brahma – Brahmani Mata

सप्तमातृका में से एक ब्रह्माणी अथवा ब्राह्मी माता सृष्टि रचयिता ब्रह्मा की शक्ति है। यह पीले रंग में दर्शायी जाती है। इनके चार सिर हैं। इनके चार भुजायें हैं। यह देवी कमण्डल, कमल पुष्प, माला तथा पुस्तक धारण करती है। इनका वाहन हंस है। ब्रह्माणी माता कई समाजों द्वारा कुलदेवी के रूप में पूजी जाती है। … Read more

Chamunda Mata – fearsome aspect of Aadishakti

चामुण्डा माता को चामुंडी, चामुंडेश्वरी, चण्डिका तथा चर्चिका नाम से भी जाना जाता है। यह देवी का विकराल रूप है। चामुण्डा सप्तमातृकाओं तथा चौसठ योगिनीयों में से एक है। इनका नाम चण्ड तथा मुण्ड से मिलकर बना है। ये दोनों दैत्य थे जिनका देवी ने संहार किया था। यह देवी काली से जुड़ा हुआ रूप है। काली भी देवी … Read more

Mavaliyan- Seven Matrikas Temple of Amber

मावलियान जिन्हें संस्कृत में मातृका कहा जाता है। इसका अर्थ “माता” है। यह सात-आठ देवियों का समूह है जिन्हें सप्तमातृका अथवा अष्टमातृका (Eight Mothers) कहा जाता है। ये अष्टमातृकायें हैं- ब्रह्माणी, वैष्णवी, माहेश्वरी, इन्द्राणी, कौमारी, वाराही, चामुण्डा तथा नारसिंही।  दक्षिण भारत में सप्तमातृका (Seven Mothers) मानी जाती है तथा अन्य कई स्थानों में अष्टमातृका (Eight Mothers) पूजी जाती हैं। अष्टमातृका मानने वाले नारसिंही को भी मातृका … Read more

Varahi Mata Temple, Amber

कौन है वाराही माता (Varahi Mata) ?वाराही माता भारतवर्ष में पूजित अष्टमातृका (Ashtmatrika) में से एक है। अष्टमातृका आठ देवियों का एक समूह है जिसे मावलियान भी कहते हैं। संसार में प्रत्येक वस्तु, पदार्थ, जीव आदि को क्रियाशील होने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ब्रह्माण्ड की धुरी शिव को भी क्रियाशील होने के लिए आदिशक्ति … Read more

षट् शक्ति Sorts of Shakti

शिव केवल महाशक्ति के द्वारा ही प्रकाशित होते हैं, अन्यथा कभी नहीं। गहरी समाधि में लीन तपस्वी भी महाशक्ति के प्रकाश के बिना शिव को नहीं पा सकते। शक्ति को जानने के लिए इनकी छः भागों में परिकल्पना की गई है। ये  षट् शक्ति हैं-  1. पराशक्ति  2. ज्ञानशक्ति  3. इच्छाशक्ति  4. क्रियाशक्ति  5. कुण्डलिनीशक्ति और  6. मातृका … Read more

Aadishakti: The Power of Shiva

Aadi Shakti

जगत की उत्पत्ति सहित जितनी भी  सांसारिक और ब्रह्माण्डीय क्रियाएं हैं उन सबके कर्ता शिव हैं। समस्त ब्रह्माण्ड की धुरी शिव हैं। ज्ञाता एकमात्र शिव हैं। निमित्त भी एकमात्र शिव हैं। संसार को नियमित रखने वाले शिव हैं। और जिस अचेतन शक्ति में माध्यम से शिव में कर्तृत्व भाव है वह आदिशक्ति है। आदिशक्ति जो शिव … Read more

This site is protected by wp-copyrightpro.com