गर्गवंशी ब्राह्मण समाज का परिचय, इतिहास,गौत्र एवं कुलदेवियाँ | Gotra wise Kuldevi List of Garg Vanshi Brahmin Samaj

     विनोद शर्मा  कृष्णगौड़ ब्राह्मण सेवा समिति, जयपुर  द्वारा प्रेषित आलेख       ब्राह्मणोत्पत्ति  दर्पण व जाति भास्कर आदि से प्राप्त अभिलेखों के अनुसार महर्षि गर्ग ऋषि की संतान गर्गवंशी ब्राह्मण कहलाते है,ब्राह्मण वर्ग जो शिक्षण, अध्यापन का कार्य करते थे वे गुरु ब्राह्मण कहलाते है।          गुरु का अर्थ है अध्यापक, शिक्षक,आचार्य,उपाध्याय । गर्ग ऋषि के … Read more

तंवर राजवंश की कुलदेवी व कुछ विशेष जानकारियां |Tanwar Rajput Vansh Kuldevi | Yogmaya Temple Delhi |Chilay Mata

तंवरों की कुलदेवी ”योगमाया” या चिलाय माता तंवर या तोमर राजवंश का भारत के इतिहास ही नहीं बल्कि संस्कृति में भी महत्त्वपूर्ण योगदान है। इस राजवंश ने सैकड़ों वर्षों तक दिल्ली पर एकछत्र शासन किया है। तोमर राजवंश की उत्पत्ति चंद्रवंशी पाण्डवों के वंश से हुई है। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने वर्तमान दिल्ली के पास हस्तिनापुर … Read more

क्या अग्रवाल समाज भी है भगवान् राम का वंशज ? Bhagwan Ram ke Vanshaj Agrawal Samaj

सुप्रीम कोर्ट में रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद प्रकरण की सुनवाई के दौरान जब न्यायाधीश ने पूछा कि क्या भगवान राम के वंशज अब भी मौजूद हैं ? तो वकील तत्काल कोई जवाब न दे सके। इस विषय में सबसे पहला वक्तव्य जयपुर के कछवाहा राजघराने की पूर्व राजकुमारी सांसद दीयाकुमारी का आया। उन्होंने कुछ दस्तावेजों का … Read more

लोधा जाति का इतिहास, खांप व कुलदेवी | Lodha Caste History Kuldevi Khap Gharane

परिचय  लोधा अपने को यदुवंशी बतलाते हैं। इनकी ख्यातों के अनुसार ये भुवनपाल यादव के द्वितीय पुत्र सामंत के वंशज हैं जिसने लुधियाना बसाया था। तब से ही यह लोधा कहलाने लगे। लोधी (या लोधा, लोध) भारत में पायी जाने वाली एक किसान जाति है। ये मध्य प्रदेश में बहुतायत में पाये जाते हैं, जहाँ यह लोग उत्तर प्रदेश से … Read more

Devra Chauhan Rajput Vansh History Khap Thikane

देवड़ा, चौहान राजवंश की एक प्रसिद्ध खांप है | राजतरंगिणी (1205 वि.) ज्ञात होता है कि 1205 वि. से पूर्व ही 36 राजपूत राजवंश बन चुके थे | उस समय देवड़ा चौहानों की उत्पत्ति हो चुकी थी और भीनमाल पर उनका स्वतंत्र राज्य हो चुका था | चौहानों की खांप होने के बावजूद भी देवड़ा … Read more

चौहान वंश का इतिहास, शाखायें, ठिकाने व कुलदेवी | Chauhan Rajput Vansh History in Hindi |Kuldevi

चौहान वंश का परिचय  Chauhan Vansh in Hindi: चौहान वंश, जिसे चौहान राजवंश के रूप में भी जाना जाता है, एक प्रमुख राजपूत वंश है जिसने उत्तरी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों पर चार शताब्दियों तक शासन किया। अपने सैन्य कौशल के लिए प्रसिद्ध इस शक्तिशाली राजवंश ने भारतीय इतिहास और संस्कृति पर स्थायी … Read more

प्रजापति / कुम्हार समाज का परिचय, इतिहास, शाखायें व कुलदेवी श्रीयादे माता | Prajapati Samaj Kuldevi | Shriyade Mata | Kumhar Caste History in Hindi

परिचय :- Prajapati Samaj | Kumhar caste history in hindi : कुम्हार शब्द का जन्म संस्कृत भाषा के ‘कुम्भकार’ शब्द से हुआ है | जिसका अर्थ है -मिट्टी का बर्तन बाने वाला | द्रविड़ भाषाओं में भी कुम्भकार शब्द का यही अर्थ है | कुम्हारों का दुसरा नाम प्रजापत भी है | “भांडे” शब्द का प्रयोग भी … Read more

यदु वंश /यादवों का इतिहास, शाखायें व कुलदेवी | History of Yadu Vansh | Yadav Samaj ka Itihas | Khaanp | Kuldevi

यदुवंश का परिचय व इतिहास  भारत की समस्त जातियों में यदुवंश बहुत प्रसिद्ध है | माना जाता है कि इस वंश की उत्पत्ति श्रीकृष्ण के चन्द्रवंश से हुई है। यदु को सामान्यतः जदु भी कहते हैं तथा ये पूरे भारत में बसे हुए हैं। श्रीकृष्ण के पुत्रों प्रद्युम्न तथा साम्ब के ही वंशज यादव कहलाये। इन्हीं के वंशज … Read more

गहलोत वंश का परिचय, इतिहास और कुलदेवी बाणमाता |Guhilot / Gahlot History|Kuldevi

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गुहिलोत वंश का इतिहास  |History of Guhilot Vansh: भगवान राम के असली वंशधर  Guhilot / Gahlot / गुहिलोत / गहलोत : इस वंश के स्वामी और छत्तीस कुल के भूषण, सूर्यवंशी महाराणा चित्तौड़ाधीश हैं, यह रामचन्द्र जी के असली वंशधर माने जाते हैं, सूर्यवंशी अंतिम राजा सुमित्र से इनका सम्बन्ध है, इनके कुल का विस्तार से … Read more

इस दुर्लभ स्तुति से होंगी महालक्ष्मी प्रसन्न | SHREE MAHALAKSHMI STOTRA | STUTI | AYI MAHALAKSHMI VIPATTI NIVARINI

#Shree#Mahalakshmi#Stuti#Stotra भगवती महालक्ष्मी को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय। .. इस दुर्लभ श्री महालक्ष्मी स्तुति को सुनिए और साथ-साथ पाठ करिये। जय माँ महालक्ष्मी … Shree Mahalakshmi Stotra | महालक्ष्मी स्तोत्र : (सर्वाधिकार सुरक्षित) अयि महालक्ष्मि विपत्ति निवारिणि दैन्यविदारिणि विश्वनुते, प्रेमानन्दसुधारसभासिनि भक्तिप्रकाशिनि प्रीतिभरे | ऋषिमुनिहृदयागारनिवासिनि नीतिविकासिनि तापहरे, जय जय हे भगवति जगदीश्वरि श्रीः परमेश्वरि … Read more

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