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Gotra wise Kuldevi List of Oswal Community ओसवाल समाज की कुलदेवियाँ

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ओसवाल समाज का प्राचीन नाम उपकेश है। उपकेश वंश के लिए उकेश व उएश शब्द भी प्रयुक्त होते हैं। इनके स्थान का नाम उकेश था जो वर्तमान में ओसियां कहलाता है। ओसियां में रहने वाला जैन समाज ओसवाल कहलाता है।



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भारतीय संस्कृति व समाज में कुलदेवी का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रत्येक समाज गोत्र के अनुसार अपनी कुलदेवी की पूजा व आराधना करता है। ओसवाल समाज में प्रारम्भ में 18 गोत्रों का निर्माण हुआ था। ये गोत्र इस प्रकार हैं –
1. तातेड़, 2. बाफणा, 3. कर्नाट, 4. बलहारा, 5. मोराक्ष, 6. आईचनाक, 7. भूरी, 8. भटेवड़ा, 9. भादर, 10. कुलहट, 11. बिरहट, 12. संचेती, 13. श्रीश्रीमाल, 14. चींचट, 15. कूमट, 16. डीडू, 17. श्रेष्टी, 18. लघुश्रेष्टि आदि ।

ओसवाल समाज के उदय से अब तक कई गोत्रों का निर्माण हो चुका है। ओसवाल समाज के इन विभिन्न गोत्रों व उनकी कुलदेवियों का विवरण निम्नलिखित है। यदि इस लिस्ट में किसी गोत्र व कुलदेवी का नाम छूट गया हो तो कृपया कमेंट करके जानकारी दें –

 

Kuldevi List of Oswal Samaj ओसवाल समाज के गोत्र एवं कुलदेवियां

सं.कुलदेवीउपासक सामाजिक गोत्र (Gotra List of Oswal Samaj)

1.

   अधर माता(AdharMata)

अरणोदा (Arnoda), अलंजडा (Analjada), अलावत (Alawat), अहकासा (Ahkasa), आलावात (Alawat), उपट (Upat), कक्का (Kakka), कपासिया (Kapasia), करणिया (Karania), करणाणी (Karnani), कायेल (Kayel), काला परमार (Kala Parmar), कावा (Kawa), कूंकड़ (Kunkad), केनिया (Keniya), केलण (Kelan), कोकलिया (Kokalia), खीर (Kheer), खुरदा (Khurda), गडिय़ा (Gadia), गपालिया (Gapalia), गांग (Gaang), गादवाना (Gadwana), गांधी सहस्रगुणा (Gandhi Sahasraguna), गिडिया (Gidiya), गेढवाड़ (Gedhwad), गोड (God), गोडवाल (Godwal), गोडवालिया (Godwalia), गोडी (Godi), गोप (Gop), गोसलिया (Gosalia), गंग (Gang), गांगरिया (Gangariya), घुरिया (Ghuria), चापड़ (Chapad), चोभावत (Chobhawat), चौहाणा (Chohana), चौधानी (Chaudhani), छाहड़ (Chhahad), जपाला (Japala), जागा (Jaga), झोडोलिया (Jhodoliya), टोगिया (Togia), टोडरवाल (Todarwal), डीडू (Didu), डोड (Dod), डांगी (Dangi), थरावट (Tharawat), दरड़ा (Darda), दुगसा (Dugsa), दुगविया (Dugvia), दुधेडिय़ा (Dudhedia), दुधोडिय़ा (Dudhodia), देवानंद साका (Devanand Saka), देशलाणी (Deshlani), धाधु (Dhadhu), धारिया वलाह (Dharia Valah),धुरिया (Dhuria), नपाणी (Napani), निवणिया (Nivnia), निवेणिया (Niveniya), पटवा गांग (Patwa Gang), परमार (Parmar), पालावत (Palawat), पूर्ण (Purn),बंब (Bamb), बरड़ (Barad), बरडिय़ा (Baradia), बड़दिया (Badadia), बड़ोदिया (Badodia), बलदोटा (Baldota), बाबेल (Babel), बीजल (Beejal), बिसलाणी (Bislani), बुरड़ (Burad), बौरड़ (Baurad), बांभी (Bambhi), भड़ (Bhad), भाटिया (Bhatiya), भाटी (Bhati), भावराणी (Bhavrani), भूवाणी (Bhuwani), मरड़ोचा (Mardocha), मरूथलिया (Maruthaliya), मालदे (Malde), मुलाणी (Mulani), मोहिवाल (Mohiwal), मोनानी (Monani), वरदिया (Varadia), वीजल (Vijal), विरावत (Viravat), सहस्त्रगुणा (Sahasraguna), सुघड़ा (Sughada), हरिगा (Hariga), हिराणी (Hirani)।

2.

   अम्बा माता (AmbaMata)अजमेरा (Ajmera), अथगोता (Athgota), अम्बागोत्र अम्बिका (Ambagotra Ambika), आच्छा (बागरेेचा) (Aachha-Bagrecha), उदेश (Udesh), ऊपरगोठा (Upargotha),कछीनागड़ा (Kachhinagda), कडक़ (Kadak), कड़बड़ा (Kadbada), कबदी (Kabdi), कावेडिय़ा (Kawedia), कूकड़सांड (Kukadsand), कोठिया (Kothia), कोरा (Kora), खांपडिय़ा (Khanpadia), खाबडिया (Khabadia), खारा (Khara), खारिवाल (Khariwal), गोतम गोता (Gotam Gota), गोपाल गोता (Gopal Gota), घरवेला (Gharvela), जागरवाल (Jagarwal), जालोरा बागरेचा Jalora Bagrecha, जिरावला (Jiravala), जोगड़ेचा (Jogdecha), जोधावत (Jodhavat), सालेचा (Salecha), झामड़ (Jhamad), झावड़ (Jhavad), टड्डा (Tadda), ठाकुर (Thakur), डागलिया (Dagalia), डोसी (Dosi), ढड्ढा (Dhaddha), ढेढिया (Dhedhia). तिलोरा (Tilora), तेलहरा (Telhara), ददा (Dadaa), दट्टा (Datta), दातीवाडिय़ा (Datiwadia), दिखल (Dikhal), दोषी (Doshi), धरकट (Dharkat), धर्म (Dharm), धोखा (Dhokha), नागदार सोलंक (Nagdar Solank), नागसेठिया (Nagsethia), नागौतरा (Nagotara), नाणगोता (Nangota), निवाणी (Niwani), नेनगोता (Nengota), पामेचा (Pamecha), पाटणिया सालेचा (Patania Salecha), पिथलिया डोसी (Pithalia Dosi), पूनमिया सालेचा (Punamia Salecha), पोलावट (Polawat), पंचलोढा (Panchlodha), फितुरिया (Fituria), बग (Bag), बनावत (Banawat), बडेरा (Badera), बागड़ेचा (Bagdecha), बालुकिया (Balukia), मांडोत (Mandot), लुक्कड़ (Lukkad), लुकद (Lukad), सियाल (Siyal), सबिया (Sabia), संचेती (Sancheti), सालेचा (Salecha), साव (Saav), सियाल सांड (Siyal Sand), सिरोहिया (Sirohia), सुभद्रा (Subhadra), सोनाड़ा (Sonada), सोनी बागरेचा (Soni Bagrecha), सोनी मरलेचा (Soni Marlecha), सोलंकी लुंकड़ (Solanki Lunkad), संघी बागरेचा (Sanghi Bagrecha), संघी मेहता (Sanghi Mehta), सांड (Sand),  सालेचा (Salecha), सुडाला (Sudala), हरखावत पामेचा (Harkhawat Pamecha), हंस (Hans), श्रीपति (Shripati)।

3.

आशापूरा माता

(AshapuraMata)

अग्नीगोत्र, अरडक़, अलमेची, आईडी, आंचलिया, आपागोत, आयट, आबेड़ा,आशद, आशापुरा, ईसरा, कछोल, कटारिया, कणीवत, कपूर, कमाणी,कमेडिया, कयाणी, करणा, कवाड़, कागोत, कांठेड, काठेलवाल, कावलेचा, काशरिया, कूदणेचा, कूलामोर, कूकल, कूकूरोल कवाड़, कुवाडिया, कोंच, कोटेचा, कोंद, खखड़, खड़बड़, खटबड़, खटोल, खटोर, खाटेड, खांटोड, खुटोल, खेतलाणी, खेतसी दुग्गड़, गांधीराय, गांधी मेहता, गुजराणी, गेलड़ा, गोगड़ पीपाड़ा, गोंद, गोदा, गोरवाल, चहुआण, चंडालिया लूंगा, चापरवाल, चालूका, चिरडकिया,चीपा, चौहान, चौवडिय़ा, चिंप, छाजोड़, छावड़ा, जैसलमेरिया, जिन्नाणी, जिलाणी, टापडिय़ा, टिमरेचा, डफरिया, डागा, डीया, डोडियालेचा, ताला,  तालेरा, तालेड़ा, तुला, तुंड, दुग्गड़, दुदचैना, देवड़ा, नारायण गौत्र, नाहटा कटारिया, पारखविंद, पावेचा कटारिया, पूजाणी,  फलौदिया तुंड, बलिया, बलाहा, बाबेल, बाबेला, बालौत, बीहल, बेडा, बोलिया, बोकड़िया,  भटावीर, भलभला, भालडिय़ा, भाभु, भंडारी, राजाणी, रामसेण, रायभंडारी, रिहड़, लेरखा, वागेटा, संकलेचा, संकवाल, सफला, सांचा संगी, सांचौरा, सामरिया, सुखलेचा, सुखाणी, सुगड़, सुगड़ा,, सेमरा, सोनगरा, संडासिया, सांडिया, सापद्राह, हरसोरा, हाडा कटारिया, हाला खंडी।

4.

   केलपूज माता       (Kelpuj Mata)खाबिया (Khabiya), बंड (Band), बरमेचा Barmecha, बांठिया (Banthia), मलावत (Malawat),  मोदी बरमेचा (Modi Barmecha), ललवाणी (Lalwani), हरखावत बाठिया (Harkhawat Bathiya)।

5.

  खींवज माता       (Khimaj Mata)तलेसरा (Talesara), पगारिया (Pagaria), मेड़तवाल (Medatwal), कास्टिया (Kastiya), गिरिया (Giriya), चिरपुरा (Chirpura), चूड़ावत (Chudawat)।

6.

  गाजर(रोहिणी)माता (Gajar Rohini Mata)करल (Karal), गगोलिया (Gagoliya), गुंदेचा (Gundecha), डाबड़ा (Dabra), बागाणी (Bagani)।

7.

  जमवाय माता     (Jamwai Mata)गांगोलिया (Gangolia), जाभरी (Jabhri)।

8.

  झंकार माता   (Jhankar Mata)जलवाणी (Jalwani), पांच सौ बोहरा (Panch Sau Bohra)।

9.

 नागणेशी (नागणेच्या) माता             (Nagnechi Mata)ईशपगोत्र (Ishapgotra), उहावता (Uhavta), ओटावत (Otawat), खोखड़ (Khokhar), गोगादे (Gogade), गोलिया (Goliya), घाघरिया (Ghaghariya), घुलुंडिया (Ghulundia),घियानक्षत्र (Ghiyanakshatra), घिया गलुंडिया Ghiya Galundia), घेमावत घोघल (Ghemawat Ghoghal), जोधा (Jodha), धवेचा (Dhavecha), धोधड़ (Dhodhad), नसोलिया नक्षत्र (Nasolia Nakshatra), पड़ाइया (Padaiya), पुष्करणा (Pushkarna), बिदायी (Bidayi), मोहनोत (Mohnot), राठौड़ (Rathore), राणावत (Ranawat), रातडिय़ा (Ratadia), संघोई (Sanghoi), हथुंडिया (Hathundia), हथुंडिया राठौड़ (Hathundia Rathore)|

10.

  पद्मावती माता (PadmavatiMata)पल्लीवाल (Palliwal)।

11.

 पाडलमाता            (Padal Mata) टाक (Tak)।

12.

   बड़वासन माता(Badwasan Mata) लोढ़ा (Lodha)।

13.

ब्रह्माणी माता / भंवाल  माता मेड़ता  (Brahmani Mata)आडवाणी (Adwani),ओडाणी (Odani),करड़ (Karad), करोलीवाल (Karoliwal), कलसोणिया (Kalsoniya), कांदली (Kandli), गुर्जरगोता (Gurjarota), गुर्जर (Gurjar),  गेवाल (Gewal), नागरिक (Nagrik), बैंगाणी (Baingani), लुणिया (Lunia)।

14.

 बाण माता      (Ban Mata)एणिया (Eniya),कपोल (Kaapol),काकोल (Kakol),काजोत (Kajot),केलवा (Kelwa),खेतसी नीसर (Khetsi Nisar), गहलोत (Gehlot), गुगलिया (Gugalia),  गेलतर (Geltar), गौत्तम (Gautam), गोदारा (Godara), गोराणा (Gorana), टिबाणी तिवड़किया (Tibani Tivadkiya), निसक (Nisak), पीपाणा (Pipana)।

15.

 बीसल माता (Bisal Mata)आढ़ा (Aadha)।

16.

बीसहत्थ माता

(BeesHath Mata)

कोचर (Kochar), कोचरमूथा (Kocharmutha), जालोरी कोचर (Jalori Kochar),जिवाणी (Jivani),रूपाणी (Rupani)।

17.

 भवानी माता  (Bhawani Mata)नाहर (Nahar)।

18.

भुवाल माता  (बिरामी, जोधपुर)     (Bhunwal Mata) काजलोत (Kajlot), काजल (Kajal), चामड़ (Chamad), चावा (Chawa), छाजेड़ (Chhajed), नखा (Nakha), रूठिया (Ruthia)।

19.

  रुद्र माता               (Rudra Mata)आछरिया (Aachhariya), आगरिया (Aagaria), खरभंसाली (Kharbhansali), खजांची मुगड़ी (Khajanchi Mugdi), चंडालिया भंसाली (Chandaliya Bhansali),चील मेहता (Cheel Mehta), चील (Cheel)।

20.

लेकेक्षण (लीकासण) माता (Likasan Mata)खमेसरा (Khamesara), खींवसरा (Khimsara)।

21.

  लोदरमाता             (Lodar Mata)आघडिण (Aaghdin), आघरिया (Aagharia), कछवाह (Kachhwah), कांधल (Kandhal), जडिया तेलवाणी (Jadiya Telwani), पावेचा राखेचा (Pawecha Rakhecha), बद्धाणी (Baddhani), भूरा भंसाली (Bhura Bhansali), भंसाली (Bhansali), भंसाली खड़ (Bhansali Khad), भंसाली राय (Bhansali Rai), भंसाली ईसरा (Bhansali Eesra), राखेचा (Rakhecha), राय भंसाली (Rai  Bhansali),सोलंकी (Solanki), सोलंकी सेठिया (Solanki Sethiya)।

22.

 सच्चियाय (संचाय) माता   (Sachchiyay Mata)अछूणता-अघूणता,अटकलिया,अनबिंध (पारख), अब्बाणी, अभ्राणी, अरडक सोनी, आईचियाण, आकतरा, आच्छा (कर्णावट), आडेचा, आदित्यनाग, आभड़, आमड, आर्य, आववाडिया, आसाणी, इडलिया, इरोढा, इलदिया, इसराणी, ऊजोत, ऊएश, ऊकेश, ऊडक़ भूरि, उदेचा, उदावत, उणावत,
उधावत, ओस्तवाल, ओसवाला।
ककड़, ककोल, कजारा, कटारा, कर्पदशाखा, कठोतिया, कठोरिया, कान्यकुब्ज, कनौजिया, ककरेचा, कपूरिया, कमटिया, कर्पद, करचू, कर्णी, कर्णाट, करणोत, कर्णावट, करमोत, करवा, करेलिया, कलटोदी, कटरोही, काला, कवाडिय़ा, कस्तुरिया, काकेचा, कागड़ा, कागला, कांच, काजलिया, काजाणी, काटी, कातरेला, कानूंगा-भटनेरा, कापूरित, कावरिया, काविया, काम, कामसा, कामाणी, काला,  कावडिय़ा, कावसा, काश्यप, कात्ररैला, कांकरिया, कांकरेचा, कागलोत, कांगसिया, कांच, किलोल, किस्तुरिया, कूकड़ (चौपड़ा), कूकम, कुचेरिया, कुंडिया, कूपावत, कूबडिय़ा, कूबडिय़ा आमड़, कूबडिय़ा बाफना, कूबेरिया,कूमट, कूमकूम, कुरकुचिया, कूरा, कूलधर, कूलधरा, कूलहट, कुशलोत, कूहाड़, कूकड़सांड, कूकड़ा, कूकूरोलचौपड़ा, कुंपावत, कुमटिया, केकडिय़ा, केदार, केदारा,केलाणी, केशरिया, केशरिया सामसुखा, कोकड़ा, कोटडिय़ा, कोटी, कोटीचा, कोटरिया, कोस्टागार, कोणेजा, कोनेरा, कोलोरा,कोसिया।
खरभंडारी, खजांची श्री श्रीमाल, खजांची चोराडिय़ा, खजांची लघुश्रेष्ठी, खंडेलवाल, खंडिया, खपाटिया, खरभंडारी, खारड़, खालिया, खेड़वाड़, खींचा, खीलोला, खुमणिया, खुमाणा, खेतपालिया, खोखरा, खोका, खोड़वाड़, खोडिया, खोडीवाल, खोना, खोपर।
गज्जा, गज्जा पटवा, गटाघट, गटिया, गड़वाणी, गणधर चौपड़ा, गणधर गांधी, गड़वाली, गरूड़, गलाणी, गलूंडिया, गसणिया, गहियाला, गागा, गादिया, गांधी संचेती, गांधी दुदिया, गांधी श्रेष्ठी, गांधी बाफना, गिंगा, गुजराणी नागड़ा, गुगलिया चोरडिय़ा, गुगलेचा, गुलगुलिया, गुडक़ा, गुणिया, गुमलेचा, गुंदिया, गहलोत, गोखरू, गोगड़भद्र, गोरीवाल, गोरेचा, गोलेछा, गोसलाणी, घरघटा, घीया गुगलिया, घुणिया, घेवरिया,
घोगड़, घोड़ावत, घंटेलिया।
चगलाणी, चतर, चतुर, चतुर मूथा, चन्द्रावत ,चपलोत, चमकिया, चम्म, चरड़, चवला, चवहेरा, चंद्रावत, चंडालेचा, चंदावत, चित्तोड़ा, चित्तोड़ा बलाह, चित्तोड़ा श्रेष्ठी, चित्तौड़ा गोलछा, चित्तौड़ा लघुश्रेष्ठी, चिंचट, चिचड़ा, चितोडिय़ा, चिपड़, चुंगा, चैनावत, चोखा, चौपड़ा कंकुं, चौपड़ा गणधर, चोमोला, चोरडिय़ा, चोरवाडिय़ा, चोरबेडिय़ा, चौववहेरा, चौमोला, चौसरिया, चौधरी तातेड़, चौधरी बाफना, चौधरी बलाह, चौधरी मोरख, चौधरी कुलहट, चौधरी वीरहट, चौधरी भूरी, चौधरी संचेती, चौधरी गुलेछा, चौधरी श्रेष्ठी,
चौधरी भद्र, चिंपड़।
छाछा, छाडौत, छगलाणी, छजलाणी, छजलाणी, छतीसा, छलाणी, छतरिया, छरिया, छाड़ोत, छालिया, छावत, छोरिया, जगावत, जडिय़ा, जमघोटा, जलघड़, जस्साणी, जागड़ा, जाटा, जाडेचा, जबक, जालोत, जालोरा कन्नोजिया, जालोरी कुलहट, जावलिया चौपड़ा, जिंद, जिंदल, जिनोत, जिमणिया भटनेेंरा,
जिमणिया चौरडिय़ा, जूनीवाल, जेनावत, जोखेला, जोगड़, जोटा, जोधावत श्रेष्ठी, जोहरी चोरडिय़ा, जोगड़ बाफना, जोगड़ा सिंघी, झाबक, झाटा।
टाटिया बाफना, टाटिया धारीवाल, टिकायत, टिकोरा, टोडियानी, टगा, टाकलिया, टांक, टिवाणी, टिहुयाण, डूंगराणी, ढाकलिया, ढाबरिया, ढेलडिया।
तप्तभट्ट, तरवेचा, तल्लाणी, तलोवड़ा,ताकलिया, तातेड़, तातहड़, तारावल, तुंड, तुलाहा, तुहियाण, तेजाणी संचेती, तेजाणी पारख, तोलिया, तोसटिया, तोडिय़ानी, तोलावत, तोलरिया, तोडिय़ान, तुलावत, थनावट, थम्बोरा, थामरेचा, थुला, दक, दफतरी-चोरडिय़ा, दफतरी बाफना, दस्सानी, दसोरा, दाखा, दातारा, दांतेवाड़िया, दादलिया, दानेसरा,दालिया, दुद्धाणी, दुधिया, देदाणी, देपारा, देलणिया, देवराजोत, देवसयाणी, देसरला, देशलहरा, दोलताणी, दोसाखा, धतुरिया, धनन्तरी, धंदाणी, धनेचा, धाकड़, धारीवाल, धातुरिया, धाधलिया, धानेवा, धाया, धापिया, धारिया, विरहट, धारोडिय़ा, धारोला, धावड़ा, धीरौत, धुगोता, धुपिया, धांधल।
नखरा, नंनक, नरसिंगा, नक्षत्रगोत्रा, नागडोला, नागड़ा, नागड़ा तातेड़, नागड़ा गुलेछा, नागर, नागौरी कुम्भट, नागौरी चोरडिय़ा, नागौरी श्रेष्ठी, नाचाणी, नाणीश, नाथावत, नानघाणी, नानेचा, नापड़ा, नामाणी, नार, नारेलिया, नावटा, नाबरिया, नावसरा, नाहटा बाफना, नाहरलाणी, निबोलिया, निलडिय़ा, निवाटा, निशानिया, नेरा, नोपता विरहट, नोपता गदेहिया, नोपोला, नांदेशा।
पंचाणीस, पंचवया, पंचीसा, पछोलिया, पटलिया, पटवा, बाफना, पटवा श्रेष्ठी, पटवा लघुश्रेष्ठी, पटवा कनौजिया, पटवा धारीवाल, पटवा गजा, पटवा वढेर, पटवारी, पटौत, पारडिय़ा, पहाडिय़ा, पाटणिया, पातावत, पानगडिया, पानौत, पारख अणविद, पालखिया, पाखा, पालगौता, पालकिया, पालावत, पाटणिया चोरडिय़ा, पाटणिया भद्र, पालणेचा, पाटोलिया, पाटौत, पारणिया, पालडिय़ा, पालणिया, पालणी, पालेचा, पिथलिया चौरडिय़ा, पुकारा, पुंगलिया, पुजारा, पूनमिया वीरहट, पूनोत गोधरा, पूरणिया, पैथाड़ी, पैपसरा, पैतिसा, पोखरणा, पौपाणी, पौपावत, पोलडिय़ा, पोसालिया, पंचविशा, पांचौरा, पांचौली, पंसारी,
पांचावत, पांडुगोता, फौफलिया, फूलगरा, बाघचार, बडज़ात्या, बपनाग, बड़बड़ा, बड़भट्टा, बच्छावत, वनावल, बनावत, बलवरा, बलिया, बलाई, बलोटा, बहुल, बहुफना, बाकुलिया, बांका, बागडिय़ा बाखेटा, बाखोटा, बाघमार, बाघ, बातोकड़ा, बादलिया, बादौला, बायना, बाफना, बापावत, बालड़ा, बाला, बालोटा, बालिया, बालौत,  बाबरिया, बाहतिया, बिनायकिया, विषपहरा, बीजाणी, बीजोत, बुच्चा, बुच्चाणी, बूबकिया, बैगलिया, बैताला ,बैद, बैदमेहता, बौक, बोकडिय़ा, बौराना,बौथरा, बांदोलिया।
भक्कड़, भडग़तिया, भटारखिया, भटनेरा, भटनेरा चौधरी, भटेवरा, भद्र, भमराणी, भलगट, भलमेचा, भलल, भाद्रगोता, भानावत, भाभू पारख, भाभू बाफना, भाला, भावड़ा, भावसरा, भिन्नमाला कर्णावट, भिन्नमाला श्री श्रीमाल, भिणटिया, भिमावट, भुवाता, भूरंट, भूराश्रेष्ठी, भूरी, भूषण, भूरट, भूतिया, भूतेड़ा, भोजाणी, भोजावत, भोपावत, भोपाला, भंडलिया, भंडारा, भंडारी डीडू, भांडावत भद्र, भूगरवाल, मक्कड़, मखेलवाल, मखाणा, मकाणा, मगदिया, मच्छा, मणियार, मन्नी, मंदिरवाला, ममहिया, मरडिय़ा, मलेचा, मखाणी, मल्ल, मरुवा, मरोथिया, मसाडिय़ा कुल्हट, मसाणिया चोरडिय़ा, महतियाण, महाजन, महाजनिया, महिवाल, माडलिया, मांडोत, मादरेचा, मारू, मालखा, मालकस, मालतिया, माला, मालावत,
मालौत, माहलाणी, मीठा, मीणीयार, मीनाग्राह,मीनारा, मीठडिय़ा बाफना, मीठडिय़ा सोनी, मुकिम, मुगड़ी, मुमडिय़ा, मुर्गीपाल, मुर्दिया, मुसलिया, मेघाणी, मेड़तिया, मेहजावत, मोतिया विरहट, मोतिया संचेती, मोदी गणधर, मौरख, मोरचिया, मौराक्ष, मौल्लाणी, मंडोवरा, मंत्री, मांडलेचा मुगडिय़ा।
यौद्धा बाफना, यौद्धा डीडू, रणजीत, रणछोड़, रणधीरा बाफना, रणधीरा श्रेष्ठी, रणधीरोत, रणसोत, रणशौभा, रत्ताणी, रतनपुत्र, रतनपुरा बुच्चा, रतनसुरा, राक्यान, राकावाल, राखडिय़ा, राठी, राडा, राज बोहरा, राज कोष्ठागार, राज सदा, राजौत, राणौत, रामपुरिया, रामाणी, रायजादा, राय सोनी, राय चौरडिय़ा, राय तातेड़, राय सच्ची, रावत, रिहड़, रिकब, रूणवाल, रूपावत, रूपछरा, रूह, रेड़, रांका, लखावत, लघु कम्भट, लघु खंडेलवाल, लघु चमकिया, लघु चिंचट, लघु चुंगा, लघु नाहटा, लघु चौधरी, लघु पारख, लघु पोकरणा, लघु भूरट, लघु रांका, लघु राठी, लघु समदडिय़ा, लघु संचेती, लघु सुखा, लघु सोढ़ती, लघु संचेती, लघु हिंगण, लघु श्रेष्ठी, लहरिया, लाखाणी, लाडवा, लाडलखा, लाभाणी, लालन, लाला, लालौत, लाहौरा, लिंगा, लुटंकण, लुणा, लुणावत गधैया, लुणेचा, लेहरिया, लोकड़ी, वसहा वडेर, वद्र्धमान, वलाह, वर्षाणी, विद्याधर, विरहट, वितरागा, वैद्य, वैद्य गांधी, वैद्य मेहता।
शाह बोथरा, शुरुलिया, शिगाल, शूरमा, शूरवा, सेठ, सिसोदिया, संकवालेचा, श्रृंखला, सेखाणी, सगरावत, संचौपा, सदावत, सदाणी, सम्भूआता, सरा, सराफ चोरडिय़ा, सराफ नाबरिया, सलघणा, सहजाणी, सहलोत चौरडिय़ा, सहलोत बाफणा, साखेचा, साघाणी, साढा, साढेराव, सादावत, सानी,सामड़ा, समुरिया, सारूलिया, सालीपुरा, सावा, सावनसुखा, सामसुखा, सावरिया, साहिब गोता, साहिला, सिखरिया, सिंघी भूरी, सिंघी डीडू, सिंघी लघुश्रेष्ठी, सिंघी भद्र, सिंघूड़ा, सिपाणी, सिलरेचा, सुखिया, सुचली, सुधा, सुधेचा, सुरती, सुरपुरिया, सुराणिया, सुसाणी, सुरिया, सुखा, सेठिया रांका, सेठिया वैद्य, सेणा, सेमलाणी, सेवदिया, सेजावत, सोजतवाल, सोजतिया, सोढ़ाणी, सोबारा, सोजावत, सोनी चोरडिय़ा, सोनी संचेती, सोनी श्री श्रीमाल, सोनी बाफना, सोनी घर, सोनेचा, सुमारिया, सोसलाणी, संघवी, सांभर, सांभरिया, सिंघड़, सिहावट, सिहावत, श्रवणी, श्राफ, श्रीधर, श्रेष्ठी, हरसोत, हरिया, हाकड़ा, हाकम, हागा, हाडा लघुश्रेष्ठी, हाडेरा, हिरणा, हिराणी, हीरावत, हुकमिया, हूना, हुब्बड़, हुल्ला,हंसा, हिंगड़, हिंडिया।

23.

 सुषमा माता (Sushmad Mata)उस्तवाल (Ustwal)।

24.

 सुसवाणी माता   (Suswani Mata)भणवट सुराणा (Bhanwat Surana),भालावत  (Bhalawat),राय सुराणा (Rai Surana),सुराणा (Surana),सांखला सुराणा (Sankhla Surana)।

25.

 सुंधा माता          (Sundha Mata)आडपावत (Aadpawat), आचू (Aachu), आयडिय़ा (Aaydia), काग (Kaag), कामटाणी (Kamtani), कूलेरिया (Kuleria), कूलहण (Kulhan), चोयल (Choyal), नागल (Nagal), नागा (Naga),  पालरेचा (Palrecha), पिछोलिया (Pichholiya), बरहुडिया (Barhudia), बूहड़ (Buhad), लुणावत आयरिया (Lunawat Aayaria)।

26.

 हिंगलाज माता     (Hinglaj Mata)अघोडिय़ा Aghodia, कीरी (Kiri), कोकूपोत्रा (Kokupotra), गाला (Gala),गंगवाल (Gangwal), घंदे (Ghande),छछा (Chhachhaa), छोगाला (Chhogala), जाड़ेचा (Jadecha), जेजटोटिया (Jejtotia), ठीकरिया (Thikaria), डोडेचा (Dodecha), भाखरिया (Bhakhariya), भुगड़ी (Bhugdi), महीपाल (Mahipal), पुनहानी (Punhani), मेहर (Mehar), लूंग (Loong), लूंगावत (Lungawat), राणोत (Ranot)।




 कुलदेवियों का परिचय

1. अधर माता – अर्बुदादेवी का प्रसिद्ध मन्दिर राजस्थान के सिरोही जिले में आबू पर्वत में स्थित है । प्राचीन शिलालेखों और साहित्यिक ग्रन्थों में आबू पर्वत को अर्बुदगिरी अथवा अर्बुदांचल कहा गया हैं । अर्बुदादेवी आबू की … Read More & View Photos

2. अम्बा माता –  गुजरात और राजस्थान की सीमा पर बनासकांठा जिले में अरावली पर्वतमाला के आरासुर पर्वत पर अम्बा माता का प्राचीन मन्दिर विद्यमान है।  पुराणों में भी इस मन्दिर का … Read More & View Photos

3. आशापूरा माता – आशापूरा (Ashapura Mata) शाकम्भरी के चौहान राजवंश की कुलदेवी थी । नैणसी की ख्यात का उल्लेख है कि लाखणसी चौहान को नाडौल का राज्य आशापूरा देवी की कृपा से मिला । तदनन्तर चौहान इसे अपनी … Read More & View Photos

4. केलपूज माता  – केलपूज माता मन्दिर नागौर जिले के किणसरिया ग्राम में है। यह कैवाय माता मन्दिर की पहाड़ी की तलहटी में स्थित है। किणसरिया गांव तथा परबतसर के बीचोंबीच स्थित है। इसकी … Read More & View Photos

5. खींवज माता – क्षेमजा / खीमज (खींवज) माता का मन्दिर नागौर जिले के कठौती ग्राम में है। कठौती डीडवाना से पश्चिम में 33 किमी. तथा नागौर से पूर्व में 61 किमी. दूर है। माता का मन्दिर एक … Read More & View Photos

6. गाजर(रोहिणी)माता – श्री रोहिणी माता / गाजर माता का मंदिर राजस्थान में पाली के समीप गुन्दोज ग्राम में है। यह मंदिर पूर्वामुखी है। इस मंदिर में अम्बा माता, रोहिणी माता, चामुण्डा माता …  Read More & View Photos

7. जमवाय माता – आम्बेर-जयपुर के कछवाहा राजवंश की कुलदेवी जमवाय माता का प्रसिद्ध मंदिर जयपुर से लगभग 33 कि.मी. पूर्व में जमवा रामगढ़ की पर्वतमाला के बीच एक पहाड़ी नाके पर रायसर आंधी जाने वाले मार्ग पर हरी-भरी पहाड़ियों की घाटी में … Read More and View Photos

8. झंकार माता  –  श्री झंकार देवी / झमकार देवी पांच सौ बोहरों की कुलदेवी मानी जाती है। पांच सौ बोहरा को थराद के बोहरा भी कहते हैं। झंकार देवी का मंदिर गुजरात के थराद नगर … Read More and View Photos

9. नागणेशी (नागणेच्या) माता – राजस्थान के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी चक्रेश्वरी, राठेश्वरी,  नागणेची या नागणेचिया के नाम से प्रसिद्ध है । नागणेचिया माता का मन्दिर राजस्थान में जोधपुर जिले के नागाणा गांव में स्थित है। यह मन्दिर … Read More and View Photos

10. बड़वासन माता – बड़वासन/बड़माता का मन्दिर नागौर जिले के मारवाड़ मूण्डवा के समीप  कुचेरा मार्ग पर भडाणा गांव  में  स्थित है। यह नागौर से लगभग 22 किमी. दूर है। मन्दिर का … Read More and View Photos



11. ब्रह्माणी माता / भंवाल  माता मेड़ता  – नागौर जिले में मेड़ता से लगभग 20-22 कि.मी. दक्षिण में स्थित भुवाल एक गाँव है । यहाँ पर विक्रम संवत् की 21वीं शताब्दी के लगभग निर्मित महाकाली का एक प्राचीन मन्दिर है । इस मन्दिर के … Read More and View Photos

12. बाण माता –  बायणमाता सिद्धपुर के नागर ब्राह्मण विजयादित्य के वंशजों के पास धरोहर के रूप में सुरक्षित रही है । जब-जब मेवाड़ की राजधानी कुछ समय के लिए स्थानान्तरित हुई वहीं यह परिवार कुलदेवी के साथ … Read More and View Photos

13. बीसहत्थ माता – बीसहत्थ माता का मन्दिर जोधपुर के भैरूबाग़ में पार्श्वनाथ जैन मन्दिर के प्रांगण में स्थित है। सिंह पर विराजमान देवी के दोनों ओर काला और गोरा भैरव की प्रतिमाएँ हैं।  मन्दिर  वातावरण में बीसहथ माता का यह मन्दिर अत्यंत …  Read More and View Photos

14. भवानी माता  – श्री भवानी माता का मंदिर नागौर दुर्ग में स्थित है। यह नाहर गोत्र की कुलदेवी है। देवी को कुलदेवी के रूप में पूजने वाले श्रद्धालु नागौर … Read More and View Photos

15. भुवाल माता  (बिरामी, जोधपुर) – बिरामी स्थित भुवाल माता का मूल स्थान ग्राम खेड (तिलवाड़ा) में था। खेड का जब विनाश होने का समय आया तब एक रात बिरामी के पुरोहित को स्वप्न में आकर माता ने कहा … Read More and View Photos

16. लेकेक्षण (लीकासण) माता  – लिकासंण माता का मन्दिर नागौर जिले के लिकासंण गांव में है। यह स्थान नागौर से 75 कि.मी. डीडवाना से 18 कि.मी. तथा छोटी खाटू से 5 कि.मी. दूर है।माता का मन्दिर एक हजार …  Read More and View Photos

17. लोदरमाता – लोदर माता भाटी राजपूतों की कुलदेवी है। लोदर माता का मंदिर राजस्थान में जैसलमेर के लोदरवा ग्राम में है। … Read More and View Photos

18. सच्चियाय (संचाय) माता  – सच्चियाय अथवा सच्चियायमाता (Sachchiyay Mata / Sachiya Mata) का भव्य और प्रसिद्ध मन्दिर जोधपुर से लगभग  60 की.मी. दूर ओसियाँ में स्थित है । ओसियाँ पुरातात्विक महत्व का एक  … Read More and View Photos

19.  सुषमाद माता – सुषमाद माताजी का मन्दिर नागौर जिले के कुचेरा ग्राम में है। मन्दिर कुचेरा बस स्टेण्ड से 2 किमी. दूर … Read More and View Photos

20. सुसवाणी माता  – सुसवाणी माता अम्बा माता का ही नामान्तर रूप है। ऐसा माना जाता है कि श्री सतीदास सुराणा कुलदेवी अम्बा माता के परम भक्त थे। सेठ श्री सतीदास की मनोकामना थी  … Read More and View Photos

21. सुन्धा माता – सुन्धामाता का प्राचीन और प्रसिद्ध मन्दिर जालौर जिले की भीनमाल तहसील में जसवंतपुरा से 12 कि.मी. दर दंतालावास गाँव के समीप लगभग 1220 मीटर की ऊँचाई का एक विशाल पर्वत शिखर  … Read More and View Photos

22.  हिंगलाज माता  – आदि शक्तिपीठों में हिंगलाज देवी का पीठ धार्मिक आस्थाओं सबसे बड़ा पीठ कहा जा सकता है । जिसका बखान हिंगलाज पुराण के साथ-साथ वामन पुराण, स्कंदपुराण  । यह स्थान कराची से 217 कि.मी. की दूरी पर स्थित   … Read More and View Photos

आपका योगदान  –

जिन कुलदेवियों व गोत्रों के नाम इस विवरण में नहीं हैं उन्हें शामिल करने हेतु नीचे दिए कमेण्ट बॉक्स में  विवरण आमन्त्रित है। (गोत्र : कुलदेवी का नाम )। इस Page पर कृपया इसी समाज से जुड़े विवरण लिखें। ओसवाल समाज से सम्बन्धित अन्य विवरण अथवा अपना मौलिक लेख  Submit करने के लिए Submit Your Article पर Click करें।आपका लेख इस Blog पर प्रकाशित किया जायेगा । कृपया अपने समाज से जुड़े लेख इस Blog पर उपलब्ध करवाकर अपने समाज की जानकारियों अथवा इतिहास व कथा आदि का प्रसार करने में सहयोग प्रदान करें।



Sanjay Sharma
Sanjay Sharma is the founder and author of Mission Kuldevi inspired by his father Dr. Ramkumar Dadhich. Mission Kuldevi is trying to get information of all Kuldevi and Kuldevta of all societies on one platform.

375 thoughts on “Gotra wise Kuldevi List of Oswal Community ओसवाल समाज की कुलदेवियाँ

  1. Unquestionably believe that which you stated. Your favorite justification seemed to be on the net the easiest thing to be aware of. I say to you, I definitely get annoyed while people think about worries that they plainly don't know about. You managed to hit the nail upon the top and also defined out the whole thing without having side effect , people could take a signal. Will probably be back to get more. Thanks

    1. जय जिनद्र जय जय गुरु देव ।
      सर जी ईंस में चौधरी गोत्र की कुलदेवी का ज़िक्र ही नहीं है सिर्फ ( चौधरी ) कुर्पिया या ऐड करे अथवा नाम बतलाय कोनसी कुलदेवी है

  2. ओसवाल सिसोदिया की कुल देवी बाण माताजी को जोड़े , बन माताजी को ब्राम्हणी माताजी भी कहा जाता हे .
    राजेंद्र सिसोदिया
    रतलाम ४५७००१ म- ९४२५०५०१५३

  3. ओसवाल जाति की विभिन्न गोत्रों की कुलदेवियां जानने का एक सरल उपाय है। अधिकांश ओसवाल गोत्रें विभिन्न क्षत्रीय जातियों से उद्भूत है। जिसे गोत्रोच्चार में ‘नख’ कहा जाता है उसका अर्थ है किस जाति की शाखा है। कुलदेवी वही रहती है जो पूर्व क्षत्रिय जाति की हो। जैसे चौहानों की शाकम्भरी या आशापुरा, परमारों की चामुन्डा या सच्चियाय माता, राठौडों की नागणेशिया आदि आदि…
    इसप्रकार अपना पूर्व नख ज्ञात हो तो अपनी कुलदेवी का सहज ही निश्चय हो सकता है।

    1. हंसराजजी (Oct 22, 2016’s comment) आपने बहुत सटीक जानकारी दी हे. जो गोत्र, क्षत्रिय जातियों से उत्पन्न हें, उनकी कुलदेवी पूर्व क्षत्रिय जाती की ही होती हे. संजयजी कृपया आप भी ध्यान दें.
      मैं खुद बच्छावत गोत्र से मेहता हूँ. हमारी पूर्व क्षत्रिय जाती – ‘देवड़ा’ गोत्र के ‘चौहान’ हैं. जिनकी कुलदेवी आशापुरा माता हे.
      खासकर, बछावातों के मध्य एसी मान्यता हे कि उनकी कुलदेवी उपरोक्त आर्टिकल वर्णन के अनुसार संचय माता (Sanchayay Mata) हे.
      यहाँ पर स्पष्टीकरण देना चाहता हूँ कि बछावातों की कुलदेवी ‘आशापुरा’ माता हे. गौर करें:
      यह कुलदेवी की प्रथा-मान्यता, विश्वास, तथा रीती-रिवाजों पर निर्भर करती हे. लेकिन तथ्य जानने पर सुधार करने की गुंजायश जरूर हे.
      इस संधर्ब में मेरी कॉफ़ी टेबल बुक, “Rajputana Chronicles: Guns and Glories – the thousand-year story of Bachhawat clan” (२०१६) को पढ़िये . धन्यवाद. Contact me at email: captainpsm@gmail.com ; http://www.pratapmehta.com

  4. जयजिनेन्द्र सा
    आपके सराहनीय प्रयास को नमन
    कोठारी (रणधीरोत) परिवार की कुलदेवी का वर्णन हमारे कुलगुरु एवम भाट द्वारा अम्बाजी के लिये बताया गया है सा कृृपया आप भी जोडने की कृृपा करावे ।

  5. पंजाबी ओसवाल समाज के अधिकांश गोत्रों में कुलदेवी के स्थान पर कुलदेवता को मानते हैं जैसे मेरा गोत्र लोहड़ा एवं मेरे कुलदेवता बाबा वैरा जी हैं।कृपया इसी प्रकार अन्य गोत्रों के कुलदेवताओं की भी जानकारी संग्रहण करने का कष्ट करें

      1. हमारा गोत्र भारद्वाज, साख सारिया जोशी है। हमे हमारी कुलदेवी के बारे में कोई भी जानकारी नही है। कृपया हमें हमारी कुलदेवी का नाम एवं उनका मंदिर किस स्थान में है, 9425663233 नम्बर में मैसेज द्वारा जानकारी देने का कष्ट करें।
        धन्यवाद

        निधीश शर्मा

  6. श्री भँवाल माताजी – बैंगानी गोत्र भँवाल माताजी (श्री कालका – ब्रह्माणी माताजी) के कुल से है। और छाजेड़ भुवाल(ब्राह्मी जी, जोधपुर) के कुल से।
    कृपया बैंगानी गोत्र को भँवाल माताजी के कुल में , व छाजेड़ को ब्राह्मी माताजी में रखे।

  7. मेरा नाम जितेंद्र बाँठिया है । मैं बीकानेर शहर का निवासी हुं।
    हमारी कुलदेवी श्री श्री दादीमाताजी कि मंदिरीजी बीकानेर शहर में ही है, आपने केलपूज माताजी का वण॔न किया है
    पुरी जानकारी देने का कष्ट करें

    1. बाबेल गोत्र में अधर माता और आशापूरा माता दोनों की ही मुख्य मान्यता है। कई परिवार अधर माता को तो कई आशापूरा माता को पूजते हैं। सम्भव है कि कुछ परिवार सती को आस्थानुसार पूजते हों अथवा स्थान के अनुसार उनको कुलदेवी के रूप में पूजते हों। परन्तु श्री चंचलमलजी लोढा (इन्होंने ओसवाल समाज पर विस्तृत अध्ययन किया है।) ने गोत्रानुसार बाबेल की उपरोक्त कुलदेवियाँ बताई हैं

    1. श्रीमान चंचलमल जी लोढा और महावीरमल जी लोढा ने ओसवाल समाज पर गहन और विस्तृत अध्ययन किया है। उन्होंने धारीवाल गोत्र की कुलदेवी सच्चियाय माता को बताया है।

  8. यशवंत कोचेटा जैन हाल निवास रायपुर छत्तीसगड
    हमारे कोचेटा कुल मे बहुत कोचेटा आशापुरा माता की मान्यता रखते है
    बहुत कोचेटा ओसियां माता की मान्यता रखते है
    लेकिन दौनों मान्यता वाले काले गोर भेरवजी की मान्यता रखते है
    अजमेर दादावाडी के शिलालेख मे दादा के बनाये गोत्र में कोचेटा लिखा है
    जहं जहां जानकारी मिलती है वहां कोटेचा या कोचेटा लिखा मिलता है ऐसा ही देश भर की दादावाडीयों कोटेचा या कोचेटा लिखा मिलता है
    संशय है कोचेटा शब्द सही है या कोटेचा ???
    इसी तरह ओसिया माता सही है या आशापुरा माता सही है
    संशय मिटता नही है ?
    हमारे अनुभव मे आया है बहुत रिश्तेदार पहचान वाले जो हमे बहुत साल से जानते है वह भी कोचेटा के स्थान पर हमें कोटेचा बोलते लिखते है
    जब तक पुराने इतिहास की जानकारी ना हो संशय नही मिटाया जा सकता???
    कृप्या एकदम सही सही जानकारी हो तो सहयोग करें
    मोब,9425138692 &8269589732

    1. यशवंत जी, श्रीमान चंचलमल जी लोढा और महावीरमल जी लोढा ने ओसवाल समाज पर गहन और विस्तृत अध्ययन किया है। उन्होंने कहीं भी कोचेटा का उल्लेख नहीं किया, बल्कि कोटेचा ही बताया है। हाँ ! ओसवाल समाज में एक गोत्र कोंच अवश्य है जिसकी कुलदेवी आशापुरा माता है। इसलिए यह कह सकते हैं की कोटेचा और कोचेटा में कोटेचा ही सही शब्द है ; और कोटेचा की कुलदेवी भी आशापूरा माता हैं।

    2. कोटेचा जी आप राजस्थान में कहा के है में भी कोटेचा ही हु।
      ओर हम भी अभी आशा पूरा माता को ही मानते लेकिन हमारी माता जी सती माता जी जो कि मेसाना के आस पास कही हैं में ने एक बार राजस्थान पत्रिका में पढ़ा था ।और यह बंगलोर में एक बार माता जी का कुछ प्रोग्राम भी हुआ था । पर किसी कारण vas में नही जा पाया ।जैसे ही पता चलेगा आप को जरुर बताऊंगा ।मेरा no, 9342014656
      9945790565

    1. वैसे गोत्रानुसार तो आपकी कुलदेवी सच्चियाय माता है। परन्तु यदि आप इतने अधिक वर्षों से आशापुरा माता को पूजते हैं तो अपनी आस्था को प्राथमिकता देने में कोई आपत्ति नहीं है।

    1. गोत्रानुसार तालेड़ा की कुलदेवी आशापुरा माताजी बताई जाती है। लेकिन यदि आप अम्बा माता को पूजते हैं तो आस्था को प्राथमिकता देने में कोई आपत्ति नहीं है। वैसे भी कई गोत्रों में यह देखा जाता है कि एक ही गोत्र में स्थान की विशेषता के कारण अलग-अलग कुलदेवियाँ पूजी जाती हैं।

    1. महेंद्र जी Confused होने की आवश्यकता नहीं है। गोत्रानुसार कर्णावट की कुलदेवी सच्चियाय माता ही है। लेकिन यदि आप आशापुरा माता को पूजते हैं तो आस्था को प्राथमिकता देने में कोई आपत्ति नहीं है। वैसे भी कई गोत्रों में यह देखा जाता है कि एक ही गोत्र में स्थान की विशेषता के कारण अलग-अलग कुलदेवियाँ पूजी जाती हैं।

  9. पालरेचा कोठारी की कुलदेवी का नाम वह जगह बताने की कृपा करें हम सभी परिवार वाले अजमेर के पास ग्राम बवाल मैं यह मती माता का मंदिर है उनको ही हमारी कुल देवी मानते हैं कृपा करके सही जानकारी

  10. में जैन समाज से हु मेरी गोत्र बम्बोरी हे हमारी कुल देवी कोंन हे और कहा पर विराज मान हे कुछ लोग कहते हे कुलदेवी का स्थान मोखन्दा राजेस्थान में हे
    प्लीज् बताए
    संजय बम्बोरी केसुर जिला धार (मध्य्प्रदेश )

  11. ओसवाल बैद परिवार के हम कुलगुरु है जो उनका पूरा इतिहास रखते है जब से उन्होंने जैन धर्म स्वीकार किया इसलिये जीन किसी सज्जनो को बैद परिवार का इतिहास चाहिये वो संपर्क करे
    रविन्द्र सिंह s/o माणकचंद राव
    वाया- लाम्बिया
    तहसील -जैतारण
    जिला- पाली
    राजस्थान
    मोबाईल नंबर -9602545305

    1. सुरेश जी, मैंने नवलखा की कुलदेवी के बारे में किसी अन्य सज्जन के प्रश्न पर उत्तर दिया था.. परन्तु भूलवश आपके प्रश्न पर Reply नहीं दे पाया, उसके लिए खेद है। मेरी जानकारी के अनुसार यह कटारिया गोत्र की शाखा है जिसे ”सामरिया नवलखा” कहते हैं। इस शाखा की कुलदेवी नाडोल की आशापूरा माता है। – http://www.missionkuldevi.in/2015/07/ashapura-devi-nadol-desuri-pali-rajasthan-html/

  12. PAMECHA, KUWAD, HARKHAVAT, SHAH

    KULDEVI

    Shri Osiya Mataji, Osiya

    In V.S. 912 Jain BhattarakShri Bhavdeo Suri enlighted King Madhavdeo Panwar, and named his gotra Pamrcha.

    In V.S. 1340 Pamacha Shah Ratanji fought bravely in the war with an axe so his family was known as Kawad.

    In V.S. 1644 Pamecha Harkhaji was a very famous person who built Jain temples in Sirohi, Jodhpur and Jalore and organized a pilgrim sang for Shatrunjay. His family was named Harkhavat. Shah was the title given to Vimalshah son of Harkhaji of Mandela.

  13. चहुयाण वास देवडागोत्रे मुलवास्तव्य नाडुलवासी तुरकाणो भयात् स्वर्णगिरौ सि्थतिः
    शंखवालीग्रामात् शंखवालगोत्रो ज.तः ।
    देव्या स्त्रयो जाताः- शंखवाली मां, साचिली मां, अंबिका मां
    संवत ७१३ माह सुदि ५ गुरु वार को कान्हडदे ने आचार्य श्री रत्नप्रभसुरि से प्रतिबोध पाकर जैन धर्म स्वीकार किया शंखवाली ग्राम मे रहने से गोत्र शंखवाल हुआ ईनकि तीन कुलदेवीया – शंखवाली मां, साचिली मां, अंबिका मां हुई

  14. सकलेचा, संकलेचा, संखलेचा सभी सुखवाल गोत्र शंखवाली ग्राम से उत्पती हुई थी व शंखवाली माॅ, अम्बा मा कुलदेवी नाम दिया था आगे उप गोत्रे तो पदवीया जैसे कोठारी, भंडारी, ममैया,मेहता, शाह, कास्टीया, बोरन्दीया, जिन्दाणी, हालाखदी, बुटा, बाला, कानुगा,संघवी, पटवा और जिस नामो से अंलकरित हुए है आपस मे व्याव शादी का रिश्ता नही करते है
    अब हमे आपके सहयोग, सबलता व सुझाव से ज्यादा सूचनाओ मे सहयोग कि जरुरत है जरूर एकजुट होकर माॅ कि मेहर
    लीला लेहर की आवाज को गगन में गुंजायमान करेगें

  15. हे माँ,
    शंखवाली धाम री धणियोणी,
    संकलेचा वंश माथे बरसावे मेहरबोणी,
    जग जणणी दुःख हरणी,
    अनेक रूप है माँ थारा,
    अंबा रूप अवतार लियो,
    शंखवाली धाम मेहर बान कियो,
    वंश बढावणो वरदान दियो,
    चव्हान वंश सु बने शंखलेचा,
    जैन धर्म का अपनाया उपदेशा,
    वंश बढा देश विदेशा ,
    कही सकलेचा, कही संकलेचा,
    कही संखलेचा, कही शंखलेचा ,
    गोत्र उप गोत्र पदवीया धारी ,
    कानुगा ,बुटा, कास्टीया, भंडारी,
    पटवा,ममैया,मेहता,जिन्नाणी
    बोरन्दीया,सघंवी ,शाह, कोठारी,
    वंश पर है माँ री मेहरबाणी , .*
    कवितांग – अशोक संखलेचा भूणिया

  16. राजमल चोपड़ा
    हमफूल माता को पूजते है
    अपने कुलदेवी साच्च्या माता बताया है
    मन मे संसय पैदा हो रहा है
    कुल देवी और भेरूजी के बारे में हमारा संसय दूर करे

  17. राजमल चोपड़ा
    हम फुला देवी को पूजते आ रहे है
    आपके द्वारा चोपड़ा की कुल देवी साच्च्या माता बताई गई है
    हमारा संसय दूर करे
    भेरू जी और हमारी कुल देवी केस्थान बतावे

  18. पींचा गोत्र की कुलदेवी भी नागणेची माता हैं।।
    राजपूतों की राठौड़ शाखा के दो भाइयों से ओसवाल गोत्र बने मोहनसिंह से मोहनोत/मुणोत और पांचीसिहं से पींचा ।
    मोहनोत और पींचा दो अंतिम ओसवाल गोत्र थे जो राजपूतों से ओसवाल बने।

  19. कोचर गोत्र की कुलदेवी का मूल स्थान फलोदी के अंदर है जहां माता जी का रथ एक नदी के किनारे में आकर के वहां पर रुक गया था और कोचर वंश की शुरुआत 1515 के अंदर फलौदी नगर से शुरुआत हुई और इसकी मूल कुलदेवी का मंदिर आज भी फलोदी शहर के अंदर प्रसिद्ध है विसात माता का मंदिर अति चमत्कारिक है जो आप बता रहे हैं जोधपुर के अंदर मंदिर है लेकिन प्राचीनता मंदिर फलोदी के अंदर है महावीर कानों का चेन्नई फलोदी फोन नंबर 938 101 9604

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