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वीरातरा की श्री वांकल माता – Shri Vankal Mata Viratra

Shri Vankal Mata Viratra
Shri Vankal Mata Viratra

Vankal Mata Viratra History in Hindi : श्री वांकल माता का मन्दिर चौहटन से 12 कि. मी. दूरी पर पर्वत की तलहटी में है जो एक ओर पर्वत श्रेणी से और दूसरी ओर बालुका राशि के पर्वताकार टीले से घिरा हुआ है इन दोनों के बीच में वांकल माता का मन्दिर स्थित है । सुदूर पश्चिम में बलूचिस्तान के पास बेला क्षेत्र में मकरान पर्वतमाला की एक गुफा हिंगुलाज के नाम से सुविख्यात है । भारत में हिंगुलाज माता की सर्वाधिक मान्यता रही है। इसी आदि शक्तिपीठ से वीरातरा माता का जुड़ाव रहा है ।

वीर विक्रमादित्य के साथ आई थी वांकल माता

ऐसी मान्यता है कि वीर विक्रमादित्य जब बलूचिस्तान के अभियान में गया तब उसने हिंगलाज माता से प्रार्थना करते हुए कहा कि यदि वह विजयी रहा तो आराधना करने के लिए उसे (माता) अपने साथ ले जाएगा । हिंगुलाज माता की कृपा से उसकी विजय हुई । तब उसने हिंगुलाज माता को साथ ले चलने के लिए अनुरोध किया । माता ने उसकी प्रार्थना स्वीकार करते हुए कहा कि मैं तुम्हारे पीछे पीछे चलती हूँ तुम मुड़कर मत देखना । अगर तुमने पीछे देखा तो मैं वही लोप हो जाउंगी । विक्रमादित्य ने अपनी सेना के साथ उज्जैन के लिए प्रस्थान किया । वह गोरणा में रुका । अनन्तर पर्वतमाला जहाँ अब देवी का मन्दिर है के निकट पहुँचते अंधेरा होने के कारण वह भ्रमित हो गया और उसने चारों ओर अपनी दृष्टि दौड़ाई इस पर देवी (हिंगलाज माता) वहीं लोप हो गई ।

इस कारण पड़ा नाम ‘ वांकल वीरातरा ‘

रात्रि को वीर विक्रमादित्य वहाँ रुका इसलिए इसका नाम वीरातरा पड़ा । कालान्तर में इस पहाड़ की चोटी पर देवी का मन्दिर बनाया गया।भक्तजनों को इस पहाड़ पर चढ़ने में कठिनाई होती थी । भक्तों द्वारा प्रार्थना  करने पर वीरातरा माता की मूर्ति जो विशाल पत्थर के साथ जुड़ी हुई थी लुढ़ककर नीचे आ गई वहीं नया मन्दिर बनाया गया है । देवी की गर्दन टेढ़ी होने के कारण इसका नाम वांकल वीरातरा माता पड़ गया । यहाँ पर चैत्र सुदि,माघ सुदि और भाद्रपद सुदि 13,14,15 को मेला लगता है । भारत के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा नेपाल से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं।

            ज्ञातव्य है कि इस देवी के प्रति असीम श्रद्धा जैसलमेर राजघराने की भी रही थी । वि.सं.1752 में महारावल अमरसिंह ने इस मन्दिर में वीरघंटा चढ़ाई थी जो अब भी यहा विद्यमान है ।

Vankal Mata Temple Viratra
Vankal Mata Temple Viratra

Sanjay Sharma
Sanjay Sharma is the founder and author of Mission Kuldevi inspired by his father Dr. Ramkumar Dadhich. Mission Kuldevi is trying to get information of all Kuldevi and Kuldevta of all societies on one platform. <iframe src="https://www.facebook.com/plugins/follow.php?href=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2Fsanjay.sharma.mission.kuldevi&width=450&height=35&layout=standard&size=large&show_faces=false&appId=1715841658689475" width="450" height="35" style="border:none;overflow:hidden" scrolling="no" frameborder="0" allowTransparency="true"></iframe>

10 thoughts on “वीरातरा की श्री वांकल माता – Shri Vankal Mata Viratra

  1. Three vankol ma kuldevi of Maththar parivar
    At: pipaliya char rasta morbi GUJ
    JAY VAKOL MA to all kuldevi brother

  2. Bujad parivar kuldevi shree vankol mataji mandeer
    Bed .jamnagar
    varvala.dev bhumi dwarka
    ukir.kutchh
    bawatra.(jalore) Rajasthan

  3. मुझे लगता है कि माताजी को गरदन टेढी होना उनका नाम वांकुल होने का तर्क ठीक नहीं है । वाणी जिनका कुल है वह विधा की देवी सरस्वती वांकुल है ।

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