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भाटी राजपूतों की कुलदेवी लोदर माता

Kuldevi of Bhati Lodar Mata Lodurva Jaisalmer history in hindi : लोदर माता भाटी राजपूतों की कुलदेवी है। लोदर माता का मंदिर राजस्थान में जैसलमेर के लोदरवा ग्राम में है। भाटी वंश की उत्पत्ति चंद्रवंशी राजा भाटी से हुई। इस वंश के राजा रिज की राजधानी पुष्पपुर (पेशावर, पाकिस्तान) थी। इनके पुत्र गज ने गजनीपुर बसाया जो वर्तमान में गजनी कहलाता है। इसका पुत्र शालिवाहन वीर, पराक्रमी और महान शासक था। जिसने शालिवाहन कोट बसाया। जो वर्तमान में सियालकोट कहलाता है। शालिवाहन का पुत्र भक्तराज पूरणमल था जो नाथ सम्प्रदाय का सौरंगीनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ और इसका पुत्र बालन्दी राज्य का उत्तराधिकारी हुआ।

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Lodar Mata

बालन्दी के पुत्र मंगलराव सियालकोट से राजस्थान आए। इनके पुत्र केहर ने तनोट दुर्ग बनवाया। केहर के पुत्र विजयराव ने बहावलपुर बसाया। और लोदरवा (लोद्रवा) को अपनी राजधानी बनाया। इन्हीं के वंशज राजा जैसलदेव ने संवत 1115 में जैसलमेर राजधानी की स्थापना की। और पटियाला जीतकर जैसलमेर राज्य में मिला लिया।

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राजा विजयराज भाटी शक्ति का उपासक था। विजयराज ने चाहनदेवी मठ का निर्माण करवाया। लोदरवा में देवी की स्थापना करने से यह चाहनदेवी लोदर माता के नाम से प्रसिद्ध हुई। भाटियों से जो जो गोत्रें बनी उनकी कुलदेवी लोदर माता है।

कैसे पहुंचे ? (How to reach  Chahan Devi Lodar Mata Temple)

जैसलमेर से मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है लोदरवा ग्राम जहाँ देवी लोदरमाता / चाहनदेवी विराजमान है। जैसलमेर से टैक्सी इत्यादि द्वारा वहाँ आसानी से पहुंचा जा सकता है।

नोट:-   यदि आप लोदर माता  को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं तो कृपया  Comment Box में अपना समाज व गोत्र लिखे।  

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