क्या अग्रवाल समाज भी है भगवान् राम का वंशज ? Bhagwan Ram ke Vanshaj Agrawal Samaj

सुप्रीम कोर्ट में रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद प्रकरण की सुनवाई के दौरान जब न्यायाधीश ने पूछा कि क्या भगवान राम के वंशज अब भी मौजूद हैं ? तो वकील तत्काल कोई जवाब न दे सके।

इस विषय में सबसे पहला वक्तव्य जयपुर के कछवाहा राजघराने की पूर्व राजकुमारी सांसद दीयाकुमारी का आया। उन्होंने कुछ दस्तावेजों का सन्दर्भ देते हुए स्वयं को भगवान राम का वंशज बताया।

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Agroha Dham Darshan

इसके बाद सीसोदिया राजवंश, राघव राजवंश आदि के बयान भी आये, तथा अब भी आ रहे हैं। ये सभी स्वयं को भगवान् राम का वंशज बताते हैं। किन्तु इस घटनाक्रम के बीच एक समाज मौन रहा है। वह है अग्रवाल समाज। वही अग्रवाल समाज जिसके वीर सपूत अशोक सिंहल जीवन भर विश्व हिन्दू परिषद् के माध्यम से रामजन्मभूमि के लिए संघर्ष करते रहे।

हिन्दू हृदय सम्राट अशोक सिंहल भगवान् राम के वंशज थे। उनका जन्म अग्रोहानरेश महाराज अग्रसेन की कुलपरम्परा में हुआ था। अग्रोपाख्यान ग्रन्थ के अनुसार महाराज इक्ष्वाकु  के परम शुद्ध कुल में मान्धाता, दिलीप, भगीरथ, रघु, राम आदि अनेक राजा हुए। उसी कुल में राजा वल्लभसेन हुए। उन्होंने प्रतापपुर में शासन किया। वल्लभसेन के प्रतापी पुत्र महाराज अग्रसेन ने राज्य का विस्तार किया तथा आग्रेय गणराज्य की स्थापना की।

कवि रामकुमार दाधीच द्वारा रचित श्रीमहालक्ष्मीचरितमानस में भी अग्रवाल कुल के प्रवर्तक महाराज अग्रसेन के पिता प्रतापपुर नरेश वल्लभसेन को भगवान् राम का वंशज माना गया है। श्रीमहालक्ष्मीचरितमानस की कथावस्तु 9 सोपानों में विभक्त है। प्रथम सोपान आदिकाण्ड की कथावस्तु के अनुसार विदर्भ देश की राजकुमारी भगवती नित्य रामायणपाठ करती थी। रामायणपाठ के प्रभाव से उसके ह्रदय में यह अभिलाषा जगी कि मेरा विवाह भगवान राम के वंशज से ही हो –

राजकुमारी भगवती नामा। गुणशालिनी तारुण्य ललामा ।।
अरुणिम किरण मनहुं सविता की। सरस उक्ति अथवा कविता की ।।

शरच्चन्द्र की चन्द्रिका स्वर्गंगोद्भव पद्म।
रूपोदधिमथनोद्भवा सुधा मधुरतासद्म ।।

सहज सौम्य करुणामयी धीरोदात्त स्वभाव।
नित रामायणपाठ से मन में उपजा भाव ।।

सूर्यवंशमणि राम के कुल में करूँ विवाह।
जननी को संकल्प यह कहा सहित उत्साह ।।

राजकुमारी भगवती को स्वप्न में एक राजकुमार दिखाई पड़ा। उसने राजकुमार का चित्र बनाकर अपनी माँ को दिखाया। यह वृत्तान्त सुनकर विदर्भनरेश ने मंत्री को चित्र दिखाकर सारी बात बताई। मंत्री ने कहा – यह चित्र सूर्यकुलभूषण भगवान् राम के वंशज वल्लभसेन का है –

मंत्री बोला चित्रगत है प्रतापपुरभूप।
सूर्यवंशमणि वल्लभभट गुणराशि अनूप ।।

क्षत्रियवर्ण सूर्यकुलख्याता। तहँ नृप हुए प्रथित बहु ताता ।।
इक्ष्वाकू दिलीप रघु दशरथ। श्री भगवान राम सब समरथ ।।
महिमा अमित न जाय बखानी। सूर प्रजावत्सल भट दानी ।।

परम्परा में राम की राजा वल्लभसेन।
हुआ प्रजावत्सल यह राखे प्रजा सुखेन ।।

विदर्भनरेश ने राजकुमारी भगवती का विवाह राजा वल्लभसेन से कर दिया। राजा वल्लभसेन और रानी भगवती के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में अग्रसेन का जन्म हुआ। उनके गुण और कर्म वैश्यवर्ण के अनुरूप थे। इसलिये उनके आग्रेय गण ने राष्ट्र के आर्थिक विकास में महनीय योगदान दिया। आग्रेय गण की राजधानी अग्रोहा की गणना भारत के श्रेष्ठ नगरों में होती थी। महाराज अग्रसेन के वंशजों ने भी वैश्यवर्ण के गुण-कर्म अपनाकर राष्ट्र का आर्थिक उत्कर्ष किया। अग्रवाल भगवान् राम के पुत्र कुश के वंशज हैं। मूलतः सूर्यवंशी होने के कारण उनके परम्परागत ध्वज में भगवान् सूर्य का चित्र है।  

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