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गर्गवंशी ब्राह्मण समाज का परिचय, इतिहास,गौत्र एवं कुलदेवियाँ | Gotra wise Kuldevi List of Garg Vanshi Brahmin Samaj

     विनोद शर्मा  कृष्णगौड़ ब्राह्मण सेवा समिति, जयपुर  द्वारा प्रेषित आलेख       ब्राह्मणोत्पत्ति  दर्पण व जाति भास्कर आदि से प्राप्त अभिलेखों के अनुसार महर्षि गर्ग ऋषि की संतान गर्गवंशी ब्राह्मण कहलाते है,ब्राह्मण वर्ग जो शिक्षण, अध्यापन का कार्य करते थे वे गुरु ब्राह्मण कहलाते है।          गुरु का अर्थ

चौहान वंश का इतिहास, शाखायें, ठिकाने व कुलदेवी | Chauhan Rajput Vansh History in Hindi |Kuldevi

राजपूतों के 36 राजवंश में चौहानों का भारतीय इतिहास में विशेष महत्त्व रहा है | इन्होंने 7वीं शताब्दी से लेकर देश की स्वतंत्रता तक राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों पर शासन किया है तथा दिल्ली पर शासन कर सम्राट का पद भी प्राप्त किया | उत्पत्ति :- चौहानों की उत्पत्ति के सन्दर्भ में

यदु वंश /यादवों का इतिहास, शाखायें व कुलदेवी | History of Yadu Vansh | Yadav Samaj ka Itihas | Khaanp | Kuldevi

यदुवंश का परिचय व इतिहास  भारत की समस्त जातियों में यदुवंश बहुत प्रसिद्ध है | माना जाता है कि इस वंश की उत्पत्ति श्रीकृष्ण के चन्द्रवंश से हुई है। यदु को सामान्यतः जदु भी कहते हैं तथा ये पूरे भारत में बसे हुए हैं। श्रीकृष्ण के पुत्रों प्रद्युम्न तथा साम्ब के ही वंशज यादव

कुलबी / पटेल समाज की कुलदेवियां | Kalbi / Patel / Anjana / Patidar Samaj ki Kuldeviya

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Kalbi / Kulbi / Patel / Anjana Samaj : कलबी या पटेल समाज के लोग राजस्थान, गुजरात एवं मध्यप्रदेश में बहुतायत से निवास करते हैं। इन्हें कलबी/Kalbi / Kulbi, कणवी/Kanvi, कुलूम्बी/Kulumbi आंजणा / Anjana आदि नामों से भी पुकारा जाता है। इन्हें गुजरात में पाटीदार / Patidar तथा मारवाड़ में पटेल / Patel

सनाढ्य ब्राह्मण समाज का परिचय व इतिहास | Sanadhya Brahmin History, Gotra

Sanadhya Brahmin

Sanadhya Brahmin History in Hindi : 'सनाढ्य' में 'सन्' तप वाचक है। अर्थात तप द्वारा जिनका पाप दूर हो गया है वे सनाढ्य ब्राह्मण कहे जाते हैं। इनका उद्भव आदिगौड़ ब्राह्मणों से ही हुआ है। सनाढ्य ब्राह्मण कान्यकुब्ज ब्राह्मणों की चौथी शाखा है। अतः इनका वर्णन भी पंचगौड़ ब्राह्मणों के

उत्कल ब्राह्मणों का परिचय व इतिहास Utkala Brahmin History, Gotra, Shakha

Utkala Brahmin History in Hindi : उत्कल का शाब्दिक अर्थ है '' कला में श्रेष्ठ'' ।  जो लोग जाति से ब्राह्मण थे और कला में सर्वश्रेष्ठ थे वे उत्कल ब्राह्मण के रूप में जाने जाते थे। अब उत्कल ब्राह्मण ओडिशा और इसके पड़ोसी राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश

औदीच्य ब्राह्मण समाज – इतिहास, गोत्र, कुलदेवियाँ Sahastra Audichya Brahmin

उदीचि का अर्थ होता है 'उत्तर'। 'उदीचि' शब्द से ही औदीच्य बना है। उत्तर दिशा से सिद्धपुर क्षेत्र में आने वाले ब्राह्मण औदीच्य कहलाये। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); औदीच्य ब्राह्मण समाज का इतिहास (History of Audichya Sahastra Brahmin Samaj) ब्राह्मणोत्पत्तिमार्तण्ड नामक ग्रंथ में सहस्त्र औदीच्य ब्राह्मण समाज का इतिहास

Gotra, Kuldevi List of Kayastha Samaj कायस्थ जाति के गोत्र व कुलदेवियां

Gotra wise Kuldevi List of Kayastha Samaj : कायस्थ जाति का वर्णन चातुर्वर्ण व्यवस्था में नहीं आता है। इस कारण विभिन्न उच्च न्यायालयों ने इनको विभिन्न वर्णों में बताया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बंगाल के कायस्थों को शूद्र बतलाया तो पटना व इलाहाबाद के उच्च न्यायालयों ने इन्हें द्विजों

मैढ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज का इतिहास व कुलदेवियाँ | Maidh Kshatriya Swarnkar Samaj History |Kuldevi

स्वर्णकार / सुनार जाति का परिचय :- Maidh Kshatriya Swarnkar Samaj History in Hindi : सुनार जाति राजस्थान के प्रत्येक गांव, कस्बे और शहर में रहती है | सुनार जाति का मुख्य व्यवसाय सोने, चाँदी आदि धातुओं के गहने घड़ना है | कुछ सुनार मीनाकर और जड़ाई का काम करते हैं |

Rajput Samaj ki Kuldeviya

rajput-samaj-ki-kuldevi

Gotra wise Kuldevi List of Rajput Samaj: राजपूत शब्द संस्कृत शब्द 'राजपुत्र' का अपभ्रंश है। प्राचीन समय में भारत में वर्णव्यवस्था थी जिसे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र इन चार वर्णों में बांटा गया था। जब राजपूतकाल आया तब यह वर्णव्यवस्था समाप्त हो गई तथा इन वर्णों के स्थान पर कई

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