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Kuldevi of Major Royal Clans (Rajvansh) of Rajasthan राजस्थान के प्रमुख राजवंशों की कुलदेवियाँ

Kuldevi of Rajput Royal Clans : राजस्थान के प्रमुख राजवंशों की कुलदेवियों का विवरण इस प्रकार है –



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Kuldevi of Rajput Royal Clans राजस्थान के प्रमुख राजवंशों की कुलदेवियाँ 

सं.कुलदेवीराजवंश

1.

अर्बुदेश्वरी माता (Arbudeshwari Mata)परमार (Parmar)

2.

अम्बरोहिया माता (Ambrohiya Mata)प्रतिहार (Pratihar)

3.

आदमाता (Aad Mata) झाला (Jhala)

4.

आवड़माता (Aavad Mata)भाटी (Bhati)

5.

आशापूरा माता (Ashapura Mata)भाटी (Bhati)

6.

करणी माता (Karni Mata)राठौड (Rathore)

7.

कामेही माता (Kamehi Mata)गौड़ (Gaur)

8.

कालिका माता (Kalika Mata)निकुम्भ, बडग़ूजर, बैस

(Nikumbh, Badgujar, Bais)

9.

कैला माता (Kaila Mata)यादव (Yadav)

10.

कैवाय माता (Kewai Mata)दहिया (Dahiya)

11.

चामुण्डा (महिषासुरमर्दिनी) माता (Chamunda Mata)प्रतिहार (Pratihar)

12.

जमवाय माता (Jamwai Mata)कछवाहा (Kachhwaha)

13.

तन्नौटमाता (Tanot Mata)भाटी (Bhati)

14.

दधिमती माता (Dadhimathi Mata)दाहिमा (Dahima)

15.

नागणेचियामाता (Nagnechi Mata)राठौड़ (Rathore)

16.

पंखनी माता (Pankhani Mata)राठौड़ (Rathore)

17.

बरवड़ माता (Barwada Mata)गुहिलोत/सिसोदिया (Guhilot / Sisodiya)

18.

बाण (बाणेश्वरी) माता (Ban / Baneshwari Mata)गुहिलोत/सिसोदिया (Guhilot / Sisodiya

19.

राठेश्वरी माता (Ratheshwari Mata)राठौड़ (Rathore)

20.

स्वांगिया (आईनाथ)माता (Swangiya Mata / Aai ji)भाटी (Bhati)

21.

शाकम्भरी माता (Shakambhari Mata)चौहान (Chauhan)

22.

शिला माता (Shila Mata)कछवाहा (Kachhwaha)



यह भी देखें – राजपूत समाज के सभी वंशों की कुलदेवियों की जानकारी हेतु Click करें >>

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44 thoughts on “Kuldevi of Major Royal Clans (Rajvansh) of Rajasthan राजस्थान के प्रमुख राजवंशों की कुलदेवियाँ”

    • क्षत्रिय भायल राजपूत की कुलदेवी कहा है ,परमार वंश से हे उपझे ,लेकिन ,बहुत बड़ा confusion हे ,उज्जैन – धार कलिका माता ,
      सचिय्या माता -ओसिया
      अर्बुदा देवी – आबू
      लेकिन भायल राजपूत की कुलदेवी कहा है ,कोई जानकारी हो तो बताये ,
      ज्योत सिंह भायल ,
      जन्म स्थानः खोड़
      जिला पाली / राजस्थान ,
      वर्तमान – मुम्बई ,महाराष्ट्र
      शेयर it on ,
      Jyotsinghb72@gmail.com

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  1. Here You can find- Parmar Rajput ki kuldevi, Pratihar Rajput ki kuldevi, Jhala Rajput ki kuldevi, Bhati Rajput ki kuldevi, Rathore Rajput ki kuldevi, Gaur Rajput ki kuldevi, Nikumbh Rajput ki kuldevi, BadgujarRajput ki kuldevi, Bais Rajput ki kuldevi, Yadav Rajput ki kuldevi, Dahiya Rajput ki kuldevi, Kachhwaha Rajput ki kuldevi, Dahima Rajput ki kuldevi, Guhilot Rajput ki kuldevi, SisodiyaRajput ki kuldevi, Chauhan Rajput ki kuldevi

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  2. कुलदेवी सम्बंधित जानकारी बहुत अच्छी लगी।ओसवाल वंशियो जैनियो की कुलदेवी ओसिया की माता है।जो पूर्व में चामुंडा देवी कहलाती थी। परमार वंश क्षत्रियो से ही बाफना गोत्र निकला है।उनकी कुलदेवी ओसिया की माता ही है।
    -रेणीक बाफना,रायपुर छग 94063-00401

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  3. मैं आप का ध्यान बिहार एवं उत्तर प्रदेश की करीबन सौ से उपर गांवों में बसे मडवढ अपभ्रंश मढवर राजपूतों को आपके सूची में शामिल करने के लिए आवेदन करता हुं जो कि राजस्थान से आकर मषाढ, नवादा बेन, कवरा, कुलहरिया एवं बिहार के अन्य गांवों में बसे हुए हैं जिसका वर्णन राठौर वंश के इतिहास काव्य रचना में वर्णन किया गया है जिसके कवि स्वः श्री श्याम नारयण सिंह पुस्तक प्रकाशित स्थान सरस्वती पुस्तक भवन, कविलासपुर, कैमूर, बिहार।
    मडवढ के गोत्र वत्स एवं कुल देबी कालरात्रि है। इस किताब की एक कॉपी मेरे पास भी उपलब्ध है, यदि आप अपनी email address देंगे तो PDF file मैं भेज सकता हूं जिससे आपको पूरी जानकारी मिल सकेगी।
    सधन्यवाद
    लोक नाथ सिंह, जमशेदपुर

    प्रतिक्रिया
    • श्रीमान् लोक नाथ सिंह जी,
      सादर प्रणाम,
      अगर मुझे भी राठौर वंश का इतिहास काव्य रचना की कॉपी pdf में उपलब्ध करा सकें तो बहुत आभार होगा आपका। हमलोग रैकवार राजपूत हैं जो राठौर वंश के 74 खापों में से एक है। हमलोग बक्सर जिला के 8 गांवों एवं छपरा जिला के कुछ गांवों में निवास करते हैं।
      मेरा ईमेल आईडी है- ycsgyan@gmail. com
      प्रणाम

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  4. राघव (बडगुजर ) राजपूतों की एक शाखा
    लोहथम्भ (लोहतमिया ) वंश जो बिहार और उत्तर प्रदेश के गंगा
    के तटवर्ती क्षेत्र में रहते हैं |
    इनकी कुलदेवी माँ चण्डी माता है |

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  5. कुछ परमार और भायल राजपूत भाइयो ने यहां कमेंट कर पूछा है कि उनकी कुलदेवी अर्बुदा माता है या सच्चियाय माता
    इस पर मैने कुछ जानकारी हासिल की है कुछ त्रुटि हो तो सुधार की गुंजाइश है
    परमारो के आदि पुरुष की उत्पत्ति इतिहासकार आबू से मानते है तथा अर्बुदा माता जिन्हें की अधर देवी भी कहा जाता है जो कि आबू में विराजमान है।अर्बुदा माता नवदुर्गा में आठवीं माता कात्यायनी का रूप है। जो कि 52 शक्तिपीठों में से एक है।आबू से राज्य विस्तार के साथ ही परमार/पंवारों की एक शाखा मालवा एवम धार में जाकर राज्य किया जो कि हरसिद्धि माता को अपनी इष्ट देवी के रूप में मानने लगे गए जिन्हें संज्ञा माता भी कहा जाने लगा।क्योंकि ऐसी मान्यता है कि हरसिद्धि माता का मूल मंदिर गुजरात के एक गांव में स्थित है जो दिन में इस मंदिर में विराजमान रहती है तथा विक्रमादित्य की भक्ति से प्रसन्न होकर संध्या आरती से लेकर सुबह तक हरसिद्धि मंदिर उज्जैन में बिराजति है।माता हरसिद्धि भी अष्ट दुर्गा रूप कात्यायनी ही है।जो सिद्धि दात्री होने से हर सिद्धि एव संध्या के समय हरसिद्धि मंदिर में पधारने से आम चलन में संज्ञा माता कहना शुरू कर दिया गया।जिन्हें उज्जैन वंशीय पंवार/परमार अपनी इष्ट देवी या कुल देवी मानते है।
    दूसरी कहानी सच्चियाय माता के रूप में।आबू से भीनमाल व भीनमाल से एक राजकुमार उपेंद्र देव परमार जो कि भीनमाल से जाकर जोधपुर में ओसिंया कस्बा बसाया।उन्होंने वह जाकर कष्ट पड़ने पर अपनी कुल देवी माता अर्बुदा / कात्यायनी अष्ट दुर्गा को याद किया जिन्होंने उपेंद्र राज को धरती चिर कर प्रगट होकर परचा दिया।माता के भयंकर रूप को देखकर उपेंद्र विचलित हो गए व डर से चीखने लगे जिससे माता की मूरत आधी ही जमीन से बाहर आई।उपेंद्र के विनती करने व मातृरूप में दर्शन देने की बात पर मा ने वात्सल्य पूर्ण रूप में दर्शन दिए।जिससे सच्चियाय माता को वात्सल्य से सात्विक रूप से पूजा अर्चना की जाने लगी।
    वस्तुतः अर्बुदा मां/सच्चियाय मां/संज्ञा/हरसिद्धि एक ही अष्ट दुर्गा रूपी कात्यायनी माता है जिन्हें परमार/पंवार राजपूत और ओसवाल जैन समाज अपने अपने पूजा विधि से पूजा अर्चना करते है व अपने अपने नामों से संबोधन करते है।
    जय माता की………..हमीर सिंह परमार

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