जमवा रामगढ़ की जमवायमाता “Jamwai Mata- Jamwa Ramgarh”

Jamwai Mata – Jamwa Ramgarh History in Hindi : आम्बेर-जयपुर के कछवाहा राजवंश की कुलदेवी जमवाय माता का प्रसिद्ध मंदिर जयपुर से लगभग 33 कि.मी. पूर्व में जमवा रामगढ़ की पर्वतमाला के बीच एक पहाड़ी नाके पर रायसर आंधी जाने वाले मार्ग पर हरी-भरी पहाड़ियों की घाटी में स्थित है।  जमवायमाता के नाम पर ही यह कस्बा जमवा रामगढ़ कहलाता है।



वर्तमान में जमवा रामगढ़ को जयपुर की जल आपूर्ति के लिए बने विशाल बाँध के कारण जाना जाता है। यहाँ पर पर्यटकों का तांता लगा रहता है। जमवाय माता का यह मंदिर रामगढ़ बांध से लगभग 2 कि.मी. दूर है। सुरम्य हरियाली से आच्छादित मनोहर प्रकृति की गोद में स्थित जमवायमाता का मन्दिर बहुत ही आकर्षक दिखाई देता है।

Jamwai Mata Jamwa Ramgarh History in Hindi :

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मन्दिर की स्थापना :

जमवायमाता का पौराणिक नाम जामवंती है। इस मन्दिर की स्थापना कछवाहा दूलहराय ने की थी। ढ़ूंढ़ाड़ में कछवाहा वंश के आने से पूर्व यह स्थान “मांच” कहलाता था। यहाँ मीणों का राज्य था। दूलहराय ने मीणों पर आक्रमण किया लेकिन उसे पराजय का सामना करना पड़ा। जब वह घायल अवस्था में था तब उसे उसकी कुलदेवी जमवा माता ने दर्शन दिए जिनकी प्रेरणा से दूलहराय ने पुनः मीणों से युद्ध किया और विजयी हुआ। तब उसने इस क्षेत्र का नाम अपनी कुलदेवी के नाम पर जमवा रामगढ़ रखा। जिस स्थान पर उसे देवी ने दर्शन दिए उस स्थान पर उसने जमवा माता के इस मन्दिर का निर्माण करवाया। आम्बेर को राजधानी बनाने से पूर्व जमवा रामगढ़ कछवाहों का केंद्र रहा। आम्बेर में इस वंश को स्थापित करने में जमवा रामगढ़ ने मुख्य भूमिका निभाई है।

Jamwai Mata Jamwa Ramgarh
Jamwai Mata
Ramgarh Dam
Ramgarh Dam
Ramgarh Fort
Ramgarh Fort

रामगढ़ में स्थित भग्न किला, प्राचीन शिव मन्दिर, दांत माता का मंदिर, जमवाय माता मन्दिर आदि आज भी मीणों और कछवाहों की भूली-बिसरी यादों को अपने में सँजो रखे हैं।

कुश के वंशज हैं कछवाहा :

इतिहासकारों की मान्यता है कि भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज ही कुशवाहा या कछवाहा कहलाये। कुश के वंशज अयोध्या से साकेत, रोहतासगढ़ (बिहार) और उसके बाद मध्यदेश आये। यहाँ नागवंशियों की कच्छप नाम वाली एक शाखा का शासन था। नागवंशी कच्छपों का दमन करने के कारण ही इनका नाम कच्छपघात या कछवाहा पड़ गया। कालान्तर में कछवाहा वंशी सोढदेव के पुत्र दूलहराय ने ढूंढाड़ में कछवाहों के राज्य की स्थापना की।

Jamwai Mata Temple Jamwa Ramgarh Jaipur
Jamwai Mata Temple Jamwa Ramgarh Jaipur
Jamwai Mata Temple Jamwa Ramgarh Jaipur
Jamwai Mata Temple Jamwa Ramgarh Jaipur
Inscription in Jamwai Mata Temple Jamwa Ramgarh Jaipur
Inscription in Jamwai Mata Temple Jamwa Ramgarh Jaipur

जमवाय माता की पूजा व प्रसाद :

चैत्र और आश्विन नवरात्रों में जमवाय माता की पूजा-अर्चना बड़े उत्सव और उल्लास के साथ की जाती है। नौ दिनों तक माता के धाम पर धूमधाम से मेला लगता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। जमवाय माता की मान्यता लोकदेवी के रूप में है। यहाँ सभी वर्ग एवं जातियों के श्रद्धालु तथा भक्तगण माता के दर्शनार्थ आते हैं।




जमवाय माता का भोग सात्त्विक है। भक्त घी और गेंहू की लापसी (मीठा दलिया) का नैवेद्य जमवाय माता अर्पित करते हैं। माता को नारियल की भेंट शुभ मानी जाती है। पारिवारिक सुख-समृद्धि आदि मनोकामनाओं की कामना से नवविवाहित जोड़ों की जात एवं नवजात शिशुओं के मुंडन संस्कार भी किये जाते हैं। कछवाहा वंश में जात-जड़ूले के साथ ही पाग के दस्तूर की धोक भी यहाँ अनवरत चलती रही है।

 

Yogini and Bhairav in Jamwai Mata Temple Jamwa Ramgarh Jaipur
Yogini and Bhairav in Jamwai Mata Temple Jamwa Ramgarh Jaipur

 

Couple worshiping in Jamwai Mata Temple Jamwa Ramgarh Jaipur
Couple worshiping in Jamwai Mata Temple Jamwa Ramgarh Jaipur

जमवाय माता के अन्य मन्दिर :

इस स्थान के अलावा भी राजस्थान में कई स्थानों पर जमुवाय माता के छोटे-बड़े मंदिर स्थित हैं।मध्ययुग तक जमवा रामगढ़ का ही जमवाय माता का पहला एवं प्राचीन मन्दिर था। इसके बाद आधुनिक युग में श्रद्धाभाव के कारण कई जगह ऐसे मन्दिर बने। शेखावाटी क्षेत्र में भोड़की (गुढा गौड़जी, झुंझुनू) के पास जमवाय माता का प्राचीन मन्दिर है। भोड़की की जमवाय माता मन्दिर में दर्शनार्थ दूर-दूर से प्रवासी आते हैं। इसी तरह सीकर जिले के मेहरोली गाँव में भी जन सहयोग एवं प्रवासी भक्तों के माध्यम से जमवाय माता का मंदिर बना हुआ है।

जमवायमाता को कुलदेवी के रूप में पूजने वाले समाज और गोत्र 

सं.समाजगोत्र

1.

खण्डेलवाल श्रावक गंगवाल, जांझरिया, कटारिया, भुंवाल्या, जलवाण्या

2.

गुर्जर गौड़ झूंझडोद्या, जूसडोद्या।

3.

राजवंश कछवाहा

4.

विजयवर्गीय अमरियो,आमटा, आसोज्या, कटरिया, खुंवाल, दुग्गा, गढ़वाल, चीटीजवाल, जलधरिया, डांस, तहतूण्या, दुग्गा, दुसाज, नाराणीवाल, बंथलीवाल, बंदीवाल, बहेतरा, बोहरा, ग्वालेरा भियाण्या, पूरभियाण्या, मेड़त्या, राजोरिया, लाटणीवाल,  वैंकटा, सुजाण्यां, सुरसरीवाल, लहटाणी।

5.

मैढ क्षत्रिय स्वर्णकार कछवाहा, कठातला, खंडारा, पाडीवाल,बीजवा, सहीवाल, आमोरा, गधरावा,  धूपा, रावठडिय़ा।

6.

खण्डेलवाल (वैश्य) बढेरा।

7.

ओसवाल गांगोलिया, जाभरी।



यदि आप भी गोत्रानुसार जमवाय माता को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं और आपका समाज – गोत्र इस लिस्ट में शामिल नहीं है, तो शामिल करने हेतु  नीचे दिए कमेण्ट बॉक्स में  विवरण आमन्त्रित है। (समाज : गोत्र )। इस Page पर कृपया इसी कुलदेवी से जुड़े विवरण लिखें। अन्य विवरण Submit करने के लिए Submit Your Article पर Click करें।
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118 thoughts on “जमवा रामगढ़ की जमवायमाता “Jamwai Mata- Jamwa Ramgarh””

  1. राजपूतो में राजावत की भी कुल देवी जमवा रामगढ़ की जमवायमाता ही ह और हमारा गोत्र राजावत ह
    इसलिए आप से निवेदन ह की हमारे गोत्र को लिस्ट में जोड़ने की कृपया करे
    जय माता जी रि

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  2. In Nakodar, Distt Jalandhar Punjab there is also a temple of Jaimwa Mata where so many Gangwal families are living from hundreds of years.. Even today 21st Nov 2017 it was annual function when all gangwal from north india gathered and worship mata with “Gur & Shakkar”… Please include it in your details..I can send photos if required.. Jai Mata Di

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  3. मे रोहित शर्मा गोत्र चौरस्या हरियाणा गौड़ ब्राम्हण समाज से हूँ हम भी जाम्वा माता जी के वाम हस्त पर विराजमान श्री माँ बडवासा माता के वंशज हे हमारे हरियाणा गौड़ ब्राम्हण समाज के अनेक गोत्र की कुलदेवी जाम्वा माता जी और बड़वासा माता जी हे

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  4. मैं सूरज सिंह गुर्जर जाति गुर्जर गोत्र चेलरवाल मेरी भी कुलदेवी जमुवाय माता है जो जमवारामगढ मे है हमारी जाती व गोत्र भी लिस्ट मे जोडे धन्यवाद

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  5. में गोपाल गौतम,गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज से हु ओर मेरी गौत्र रोइसवाल/रोहिवाल/रोईवाल हैं।
    आप से निवेदन हैं कि कृपया बताएं कि हमारी कुलदेवी जमवाय माता हैं या नही?

    आप कृपया मेरी शंका दूर करे और सही जानकारी देवे।

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