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अरोड़ा समाज की उत्पत्ति व इतिहास Arora Samaj History in Hindi

Arora samaj history in hindi | Kuldevi of Arora | Origin of Arora प्रसिद्ध साहित्यकार और इतिहासकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने खत्रियों की उत्पत्ति का वर्णन करते हुए प्रसंगवश अरोड़ा समाज का भी उल्लेख करते हुए लिखा है- ‘भगवान् राम के पुत्र लव को लाहौर का राज्य उत्तराधिकार में मिला था। उनके कुल में कालराय नामक…

खत्री समाज का इतिहास Khatri Samaj History in Hindi

Khatri Samaj History in Hindi | Kuldevi of Khatri Samaj | सूर्यवंशोद्भवाः सन्ति क्षत्रिया खत्रिसंज्ञकाः।  वंशजा रामचन्द्रस्यायोध्याधीशस्य विश्रुताः।।  लाहौरनगरे राज्यं चकार लवसंज्ञकः। कसूरनगरे राज्यं कृतवान् कुश संज्ञकः।।  लवस्य वंशजः सोढीरायः वंशप्रवर्तकः।  सोढीसंज्ञकाः तस्य कुले जाताः प्रतापिनः।। गुरुगोविंदसिंहादि पूजनीयाः मनस्विनः।  कुशस्य वंशजा जाता वेदिनो वेद पारगाः।। गुरुनानकदेवादि ख्याता युग प्रवर्तकाः।  कुलदेवी हिंगलाजाख्या खत्री कुलसुपूजिता।।   खत्री (Khatri)…

खडायता ब्राह्मण व बनिया समाज के गोत्र व कुलदेवियाँ Khadayata Brahmin Samaj and Baniya Samaj

Khadayata Brahmin Samaj History in Hindi | Gotra List | Kuldevi List | Khadayata Vaishya | Khadayata Baniya | Khadayata Vipra खडायता ब्राह्मण समाज के गोत्र व कुलदेवियाँ (Khadayata Brahmin Samaj) गुजरात में साबरमती नदी के तट पर कोट्यर्क (कोटारकु) नामक सिद्धपीठ है। वहाँ अठारह ब्राह्मण नित्य नियम से आराधना करने लगे। ये ब्राह्मण खडायता कहलाए – ततः…

नागर ब्राह्मण समाज की उत्पत्ति, इतिहास, गोत्र तथा कुलदेवता

Nagar Brahmin Samaj History Gotras in Hindi : नागर ब्राह्मण मुख्यतः गुजरात में निवास करते हैं, परन्तु राजस्थान, मालवा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, पंजाब, हरयाणा, हिमाचल प्रदेश के अलावा पश्चिम बंगाल तथा कर्नाटक में भी मिलते हैं। माना जाता है कि नागर, ब्राह्मणों के सबसे पुराने समूह में से एक है। कुछ इतिहासकारों का दावा है…

जाट समाज के गोत्रों की लिस्ट Jat Samaj History and All Gotras List

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Jat Samaj History and All Gotras List : जाट एक क्षत्रिय समुदाय है जो भारत में मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात में निवास करते हैं। पंजाब में यह जट कहलाते हैं तथा शेष प्रदेशों में इन्हें जाट कहा जाता है। जाटों की उत्पत्ति के कई सिद्धान्त प्रचलित हैं। 1. पौराणिक मान्यता के अनुसार जाटों…

मोढ समाज का इतिहास व कुलदेवी मातंगी देवी Modh Samaj

मोढ समाज का इतिहास (History of Modh Samaj) मोढ समाज मुख्यतः गुजरात में आबाद है। ब्राह्मणोत्पत्तिमार्तण्ड के अनुसार मोढ ब्राह्मणों की उत्पत्ति का इतिहास इस प्रकार है – Modh Brahmin – पद्मकल्प में भगवान विष्णु शेषशय्या पर योगनिद्रा में मग्न भगवान विष्णु के नाभिकमल से ब्रह्मा उत्पन्न हुए। भगवन विष्णु के कान के मैल से…

महाराष्ट्रीय ब्राह्मणों का इतिहास तथा गोत्रानुसार कुलदेवियाँ Maharashtrian Brahmin

ब्राह्मणोत्पत्तिमार्तण्ड में वर्णित महाराष्ट्रीय ब्राह्मणों का इतिहास (History of Maharashtrian Brahmin Samaj) संस्कृत के इस ग्रन्थ (ब्राह्मणोत्पत्तिमार्तण्ड) के श्लोकों का अर्थ डॉ रामकुमार दाधीच द्वारा किया गया है। आसीन्नृपो महातेजाः पुरूरवकुलोद्भवः। महाराष्ट्रेति विख्यातो यस्य राज्यं महत्तरम्।। तेनायं भुवि विख्यातो विषयो राष्ट्रसंज्ञकः। महाशब्दप्रपूर्वश्च यस्य पूर्वे विदर्भकः।। सह्याद्रिः पश्चिमे प्रोक्तः तापी चैवोत्तरे स्थिता। हुबली धारवाडाख्यौ ग्रामौ दक्षिणसंस्थितौ।।…

औदीच्य ब्राह्मण समाज – इतिहास, गोत्र, कुलदेवियाँ Sahastra Audichya Brahmin

उदीचि का अर्थ होता है ‘उत्तर’। ‘उदीचि’ शब्द से ही औदीच्य बना है। उत्तर दिशा से सिद्धपुर क्षेत्र में आने वाले ब्राह्मण औदीच्य कहलाये।   औदीच्य ब्राह्मण समाज का इतिहास (History of Audichya Sahastra Brahmin Samaj) ब्राह्मणोत्पत्तिमार्तण्ड नामक ग्रंथ में सहस्त्र औदीच्य ब्राह्मण समाज का इतिहास वर्णित है। गुजरात में सरस्वती नदी के तट पर पाटण नामक…

अथातो भृगु वंश जिज्ञासा-भार्गव वंश, गोत्र व कुलदेवी परिचय- डॉ. मनहर गोपाल भार्गव

Bhrigu Vansh : भृगुवंश विश्व के प्राचीनतम वंशों में से एक है। प्राचीनतम उपलब्ध ग्रन्थ ‘ऋग्वेद’ में भृगुओं का अनेक स्थलों पर पितर के रूप में स्मरण किया जाना ही उनकी प्राचीनता का ज्वलंत प्रमाण है। इस वंश का देवताओं के साथ सम्बन्ध रहा। भृगु पुत्री लक्ष्मी का विवाह त्रिदेवों में श्री विष्णु के साथ…

भार्गव समाज का उद्गम स्थल – स्व. ओमप्रकाश भार्गव

हमारे समाज के बुद्धिजीवी वर्ग में सन् 1855 से 1860 के समय में अपने समाज की जड़ें, सही पहचान तथा परिचय के विषय में एक आत्मचिन्तन की लहर आयी। ऐसा लगने लगा कि ढूसर शब्द हमारी सही पहचान तथा परिचय नहीं है। ढूसर शब्द का हमारे साथ जुड़े होने से हमारे समाज की पहचान के…

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