जगत की अम्बिकामाता “Ambika Mata-Jagat”

Ambika Mata Temple Jagat Udaipur in Hindi : उदयपुर में लगभग 55 की.मी. दक्षिण-पूर्व में अवस्थित जगत गाँव में 10वीं शताब्दी में निर्मित अम्बिकामाता के सुन्दर पर कलात्मक मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान पुरातत्त्व की दृष्टि से अनुपम स्थान है। जगत गाँव में ईसा की छठी शताब्दी के एक इष्टिका निर्मित शाक्त सम्प्रदाय के प्रसाद से … Read more

दधिसागर मथने वाली “दधिमथीमाता” “Dadhimati Mata”

Dadhimati Mata History in Hindi : नागौर जिले की जायल (Jayal) तहसील में जिला मुख्यालय से लगभग 40 की.मी. उत्तर-पूर्व में दधिमथीमाता (Dadhimati Mata) का प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर अवस्थित है। इस मंदिर के आस पास का प्रदेश प्राचीन काल में दधिमथी (दाहिमा) क्षेत्र कहलाता था। उस क्षेत्र से निकले हुए विभिन्न जातियों के लोग, यथा ब्राह्मण,राजपूत,जाट  आदि दाहिमे ब्राह्मण, … Read more

सकराय माता / शंकरा माता / शक्रा माता “Sakrai Mata”

Sakrai Mata Temple and History in Hindi : सकरायमाता का प्रसिद्ध मंदिर अरावली पर्वतमाला की मालकेतु पर्वत श्रृंखला की एक सुरम्य घाटी में सघन वन के बीच अवस्थित है। वहीं पर सरकरा नाम की एक छोटी सी प्राचीन नदी या झरना बहता है। सकरायमाता मंदिर सकरायमाता का यह मंदिर सीकर से लगभग 60 की.मी. दूर सीकर-उदयपुरवाटी … Read more

सुस्वागतम्

भारतीय संस्कृति के अनुसार देवी ही एकमात्र तत्त्व  है। सब उसी से जन्म लेते हैं और उसी में समा जाते हैं। वेद का वचन है- देवी ह्येकाग्र आसीत्। सा सर्वमजीजनत्। अर्थात् पहले एकमात्र देवी ही थी। उसी ने सबको जन्म दिया। इस प्रकार देवी मातृशक्ति है। मातृशक्ति के तीन लोकप्रिय रुप हैं- कुलदेवी माँ, माता, और … Read more

चूहों का अद्भुत मन्दिर- देशनोक की “करणीमाता” Karni Mata Temple Deshnok Bikaner

करणीमाता (Karni Mata) का प्रसिद्ध मंदिर बीकानेर से लगभग 33 कि.मी. दूर देशनोक (Deshnok) में अवस्थित है। बीकानेर-जोधपुर रेलमार्ग पर पर यह एक छोटा सा रेलवे स्टेशन है। करणी माता के मंदिर के कारण यह स्थान जांगलदेश (बीकानेर और निकटवर्ती क्षेत्र) की नाक या उसकी शान होने के कारण देशनोक कहलाया। बीकानेर के राठौड़ वंश आराध्या : … Read more

भाई-बहन के अटूट प्रेम की प्रतीक “जीणमाता” “Jeen Mata-Sikar”

Jeen Mata History in Hindi : जीणमाता (Jeen Mata) शेखावाटी  अंचल का एक प्रमुख शक्तिपीठ है। शताब्दियों से लोक में इसकी बहुत मान्यता है। जीणमाता का प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर सीकर (Sikar) जिले में रेवासा (Rewasa) से लगभग 10 कि.मी. दक्षिण में अरावली पर्वतमालाओं के मध्य स्थित है। साक्ष्यों से पता चलता है कि यह मंदिर मूलतः … Read more

आम्बेर की शिलादेवी ” Mata Shila Devi- Amber”

Shila Devi Amber History in Hindi : आम्बेर (Amber) की शिलादेवी (Shila Devi) आम्बेर-जयपुर के कछवाहा राजवंश की आराध्य देवी हैं। शिलादेवी अष्टभुजी महिषमर्दिनी की मूर्ति है। इन्हें मुग़ल बादशाह अकबर के सेनानायक आम्बेर के राजा मानसिंह प्रथम लाए थे, जिसे  उन्होनें अपनी राजधानी आम्बेर में प्रतिष्ठापित किया। इस सम्बन्ध में अधिकांश ग्रंथों के अनुसार राजा मानसिंह … Read more

जमवा रामगढ़ की जमवायमाता “Jamwai Mata- Jamwa Ramgarh”

Jamwai Mata – Jamwa Ramgarh History in Hindi : आम्बेर-जयपुर के कछवाहा राजवंश की कुलदेवी जमवाय माता का प्रसिद्ध मंदिर जयपुर से लगभग 33 कि.मी. पूर्व में जमवा रामगढ़ की पर्वतमाला के बीच एक पहाड़ी नाके पर रायसर आंधी जाने वाले मार्ग पर हरी-भरी पहाड़ियों की घाटी में स्थित है।  जमवायमाता के नाम पर ही यह … Read more

भीषण अकाल में जन-जन का भरण पोषण करने वाली शाकम्भरी माता

Shakambhari Mata Sambhar Story in Hindi : शाकम्भरी देवी (Shakambhari Mata) का प्राचीन सिद्धपीठ जयपुर जिले के साँभर (Sambhar) क़स्बे में स्थित है। शाकम्भरी माता साँभर की अधिष्ठात्री देवी हैं। साँभर एक प्राचीन कस्बा है जिसका पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्त्विक महत्त्व है। साँभर का शताब्दियों का गौरवशाली इतिहास और अपनी विशेष सांस्कृतिक पहचान रही है। … Read more

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