उदावत राठौड़ वंश का इतिहास व ठिकाने | Udawat Rathore Vansh History in Hindi

Udawat Rathore Vansh History in Hindi : जोधपुर नरेश सूजाजी के एक पुत्र उदाजी थे। इन्होंने 1539 वि. में सींधल खीवा से जैतारण विजय किया। इनके वंशज उदावत राठौड़ कहलाते हैं। राव उदा जी ने 1539 विक्रमी में सिंधल खीवा से जेतारण विजय किया। राव उदा के छः पुत्र थे – 01 – राव मालमसिंह … Read more

बीदावत राठौड़ वंश का इतिहास, परिचय व ठिकाने | Bidawat Rathore Vansh History in Hindi

Bidawat Rathore Vansh History in Hindi : बीदावत राठौड़ जोधपुर के राठौड़ राव जोधा के पुत्र बीदा के वंश हैं। राव बीदा ने भाई राव बीका और चाचा रावत कांधल की सहायता से मोहिलों को पराजित करके बीदावाटी प्रदेश बसाया जहाँ बीदा के वंशधर बीदावत राठौड़ कहलाये। बीदा ने अपने जीवन काल में बड़े पुत्र … Read more

बीका राठौड़ वंश का इतिहास, परिचय व ठिकाने | Bika Rathore Vansh History in Hindi

Bika Rathore Vansh History in Hindi : बीका जोधपुर के राव जोधा का पुत्र था। जोधा का बड़ा पुत्र नीबा जोधा की हाडी राणी जसमादे के पुत्र थे। वे पिता को विद्यमानता में ही मर गए थे। जसमादे के दो पुत्र सांतल व सुजा थे। बीका सांतल से बड़े थे। पितृ भक्ति के कारण उन्होंने … Read more

जोधा राठौड़ वंश का इतिहास, परिचय व ठिकाने | Jodha Rathore Vansh History in Hindi

Jodha Rathore Vansh History in Hindi : राव रिड़मल के पुत्र जोधा के वंशज जोधा राठौड़ कहलाये। राव जोधा जी का जन्म २८ मार्च, १४१६, तदनुसार भादवा बदी 8 सं. 1472 में हुआ था। इनके पिता राव रणमल मारवाड़ के शासक थे। इन्हें जोधपुर शहर की स्थापना के लिए जाना जाता है। इन्होंने ही जोधपुर का मेहरानगढ़ दुर्ग बनवाया था। जोधा राठौड़ों की निम्न … Read more

मेड़तिया राठौड़ वंश का इतिहास, परिचय व ठिकाने | Medtiya / Mertiya Rathore Vansh History in Hindi

Mertiya Rathore Vansh History in Hindi : जोधपुर के शासक जोधा के पुत्र दूदाजी के वंशज मेड़ता नगर के नाम से मेड़तिया कहलाये। राव दूदा जी का जन्म राव जोधा जी की सोनगरी राणी चाम्पा के गर्भ से 15 जूं 1440 को हुआ । राव दूदा जी ने मेड़ता नगर बसाया । इसमें उनके भाई … Read more

चांपावत राठौड़ वंश का इतिहास, परिचय व ठिकाने | Champawat Rathore Vansh History in Hindi

Champawat Rathore Vansh : राव रिड़मल के पुत्र चांपाजी थे। चांपाजी ने वि.सं. 1522 में सुल्तान महमूद खिलजी के साथ युद्ध किया था। वि.सं. 1536 में मणियारी के पास सीधलों के साथ युद्ध हुआ जिसमें चांपा वीरगति को प्राप्त हुए। इन्हीं चांपा के वंशधर चांपावत राठौड़ कहलाये। इनके मारवाड़ में काफी ताजीमी ठिकाने थे। जयपुर … Read more

Bishath Mata / Biswant Mata Temple Tunkaliya

बीसहथ माता  Bishath / Biswant Mata का मंदिर राजस्थान के नागौर जिले में गोटन कस्बे के पास टुंकलिया गाँव में स्थित है। बीसहथ माता की इस क्षेत्र में बहुत लोकमान्यता है जिनका मंदिर एक विशाल तालाब के किनारे पर एक पहाड़ी पर बना है। इन्हें बिसवंत माता भी कहा जाता है। ये माहेश्वरी समाज में हुरकट शाखा … Read more

गर्गवंशी ब्राह्मण समाज का परिचय, इतिहास,गौत्र एवं कुलदेवियाँ | Gotra wise Kuldevi List of Garg Vanshi Brahmin Samaj

     विनोद शर्मा  कृष्णगौड़ ब्राह्मण सेवा समिति, जयपुर  द्वारा प्रेषित आलेख       ब्राह्मणोत्पत्ति  दर्पण व जाति भास्कर आदि से प्राप्त अभिलेखों के अनुसार महर्षि गर्ग ऋषि की संतान गर्गवंशी ब्राह्मण कहलाते है,ब्राह्मण वर्ग जो शिक्षण, अध्यापन का कार्य करते थे वे गुरु ब्राह्मण कहलाते है।          गुरु का अर्थ है अध्यापक, शिक्षक,आचार्य,उपाध्याय । गर्ग ऋषि के … Read more

तंवर राजवंश की कुलदेवी व कुछ विशेष जानकारियां |Tanwar Rajput Vansh Kuldevi | Yogmaya Temple Delhi |Chilay Mata

तंवरों की कुलदेवी ”योगमाया” या चिलाय माता तंवर या तोमर राजवंश का भारत के इतिहास ही नहीं बल्कि संस्कृति में भी महत्त्वपूर्ण योगदान है। इस राजवंश ने सैकड़ों वर्षों तक दिल्ली पर एकछत्र शासन किया है। तोमर राजवंश की उत्पत्ति चंद्रवंशी पाण्डवों के वंश से हुई है। महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने वर्तमान दिल्ली के पास हस्तिनापुर … Read more

क्या अग्रवाल समाज भी है भगवान् राम का वंशज ? Bhagwan Ram ke Vanshaj Agrawal Samaj

सुप्रीम कोर्ट में रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद प्रकरण की सुनवाई के दौरान जब न्यायाधीश ने पूछा कि क्या भगवान राम के वंशज अब भी मौजूद हैं ? तो वकील तत्काल कोई जवाब न दे सके। इस विषय में सबसे पहला वक्तव्य जयपुर के कछवाहा राजघराने की पूर्व राजकुमारी सांसद दीयाकुमारी का आया। उन्होंने कुछ दस्तावेजों का … Read more

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