कहार, मेहरा व भोई समाज का गौरवशाली इतिहास: उत्पत्ति, गौत्र, खाँपें व कुलदेवी | Kahar, Mehra, Bhoi Samaj in Hindi

kahar-mehra-bhoi-samaj

Kahar, Mehra, Bhoi Samaj in Hindi: भारतीय समाज और संस्कृति के निर्माण में जल, जंगल और जमीन से जुड़े समुदायों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। कहार, मेहरा और भोई समाज ऐसे ही अत्यंत परिश्रमी, प्रकृति-प्रेमी और लोकसेवी समुदाय हैं। मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में निवास करने वाले … Read more

लखारा (लखेरा) समाज का संपूर्ण इतिहास: उत्पत्ति, परंपराएं, खाँपें व कुलदेवी | Lakhara Samaj History in Hindi

lakhara-samaj

Lakhara Samaj in Hindi: भारतीय संस्कृति में ‘सुहाग’ और उसके प्रतीकों का सर्वोच्च स्थान है, और इन प्रतीकों (विशेषकर चूड़ियों) को अपने हाथों से गढ़ने वाले महान शिल्पी समुदाय का नाम है— लखारा समाज। मुख्य रूप से राजस्थान और भारत के उत्तर-मध्य क्षेत्रों में पाए जाने वाले इस समुदाय को लखेड़ा, लखरिया, लखरा, लखावत और … Read more

ठठेरा और कंसारा समाज का गौरवशाली इतिहास: उत्पत्ति, परंपराएं, गौत्र व कुलदेवी | Thathera, Kansara Samaj in Hindi    

thathera-kansara

Thathera, Kansara Samaj in Hindi: भारतीय सभ्यता में धातु शिल्प (Metal Craft) का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। वेदों से लेकर आधुनिक युग तक, मंदिरों के कलश से लेकर घरों के पूजा-बर्तनों तक, जिस समाज ने अपनी हथौड़ी की थाप से धातुओं में प्राण फूंके हैं, वह है— ठठेरा और कंसारा समाज। मुख्य रूप से गुजरात, … Read more

सरयूपारीण ब्राह्मण समाज का संपूर्ण इतिहास: उत्पत्ति, श्रेणियां, गौत्र व कुलदेवी | Saryuparin Brahmin Samaj in Hindi

saryupari brahmin samaj

सरयूपारीण ब्राह्मणों की उत्पत्ति Saryuparin Brahmin Samaj in Hindi: भारतीय सनातन धर्म और वैदिक ज्ञान की रक्षा में जिन ब्राह्मण समुदायों का सर्वोच्च योगदान रहा है, उनमें सरयूपारीण ब्राह्मण (Saryupari Brahmin) का स्थान अत्यंत गौरवशाली है। मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश (गोरखपुर, काशी, अयोध्या, प्रयाग, बस्ती, आजमगढ़), बिहार और मध्य प्रदेश में निवास करने वाले … Read more

पटवा समाज का गौरवशाली इतिहास: उत्पत्ति, रेशम की कला, गौत्र व कुलदेवी | Patwa Samaj in Hindi

patwa Samaj in Hindi: भारतीय संस्कृति में रेशमी धागों, आभूषणों और वस्त्रों का बहुत ही पवित्र और गहरा स्थान है। मोतियों और धागों के इस खूबसूरत रिश्ते को अपनी कला से पिरोने वाले महान शिल्पी और व्यापारी समुदाय का नाम है— पटवा समाज। मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में निवास करने … Read more

सिकलीगर समाज का गौरवशाली इतिहास: उत्पत्ति, धातु कला, खाँपें व कुलदेवी | Sikligar Samaj in Hindi

Sikligar Samaj in Hindi: भारतीय इतिहास में जब भी युद्ध के मैदान में चमकती हुई तलवारों और अचूक हथियारों का जिक्र आता है, तो उनके पीछे जिस महान शिल्पी समाज की मेहनत छिपी होती है, वह है— सिकलीगर समाज। मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में फैला यह समुदाय अपने अद्भुत धातु-कौशल और … Read more

खारोल समाज का गौरवशाली इतिहास: उत्पत्ति, नमक निर्माण कला, वंश व कुलदेवी | Kharol Samaj in Hindi

Kharol Samaj in Hindi: भारतीय भोजन और जीवन में ‘नमक’ (Salt) का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है। नमक के बिना जैसे हर स्वाद अधूरा है, वैसे ही भारतीय इतिहास का पन्ना भी उस परिश्रमी समाज के बिना अधूरा है जिसने तपती धरती से इस अनमोल नमक को निकालने की कला विकसित की। इस महान शिल्पी और … Read more

धाकड़ समाज का गौरवशाली इतिहास: उत्पत्ति, शौर्य, गौत्र व कुलदेवी | Dhakad Samaj in Hindi

Dhakad Samaj in Hindi: मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के उपजाऊ क्षेत्रों में निवास करने वाला धाकड़ समाज भारत के प्रमुख कृषि और योद्धा समुदायों में से एक है। हिंदी भाषा में “धाकड़” शब्द का अर्थ ही होता है— ‘निडर’ या ‘साहसी’। यह समाज जितना कुशल धरती का सीना चीरकर अन्न … Read more

भाट चारण समाज का गौरवशाली इतिहास: उत्पत्ति, रोचक कथा व कुलदेवी | Bhaat Charan Samaj in Hindi

Bhaat Charan Samaj in Hindi: राजस्थान और गुजरात के इतिहास में शौर्य, स्वाभिमान, कला और साहित्य को जीवित रखने का सबसे बड़ा श्रेय मुख्य रूप से दो जातियों को जाता है— ‘चारण’ और ‘भाट’। लेकिन इतिहास के पन्नों में इन दोनों महान जातियों के संगम से एक और विशिष्ट और कलात्मक समाज का निर्माण हुआ, … Read more

द्रविड़ ब्राह्मण समाज का गौरवशाली इतिहास: उत्पत्ति, वैदिक परंपराएं, गोत्र व कुलदेवी | Dravid Brahmin Samaj in Hindi

Dravid Brahmin Samaj in Hindi: वैदिक उत्पत्ति और दक्षिण की ओर ऐतिहासिक प्रस्थान सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, वेदों की रक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए स्वयं सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने ब्राह्मणों की रचना की थी। इतिहास और पुराण बताते हैं कि प्रारंभिक वैदिक काल (लगभग 1500 ईसा पूर्व) के दौरान, जब … Read more

This site is protected by wp-copyrightpro.com