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यहाँ माता की खण्डित प्रतिमा की होती है पूजा | Ashojai / Asojhai / Ashujai Chamunda Mata

मान्यता है कि कभी भी देव प्रतिमा को खण्डित रूप में नहीं पूजा जाता; लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में देवी का एक ऐसा मन्दिर विद्यमान है जहाँ माता की खण्डित प्रतिमा की पूजा होती है। यह देवी मन्दिर है आसोजाई माता का मंदिर।  आशुजाई / आसोजाई / Asojhai / Achhojai

गुमानो देवी मन्दिर और चम्बल नदी की यात्रा | Gumano Devi Temple Karanpur & Chambal River

Gumano Devi Temple Karanpur : राजस्थान में करौली जिले के मुख्यालय से लगभग 56 किलोमीटर तथा देशभर में प्रसिद्ध माता कैला देवी के मंदिर से 34 किलोमीटर दक्षिण में करणपुर नाम का एक नगर स्थित है। इस नगर में गुमानो देवी का प्रसिद्ध मंदिर विद्यमान है जहाँ श्रद्धालु देवी के दरबार

नक्कश की देवी-गोमती धाम और हिण्डौन की यात्रा | Nakkash ki Devi-Gomti Dham, Hindaun

Nakkash ki Devi Gomti Dham | नक्कश की देवी - गोमती धाम हिंडौन शहर के मध्य में स्थित है। इस मन्दिर को Hindaun City का हृदय कहा जाता है जो कि जलसें तालाब के किनारे पर स्थित है। यह गोमतीदासजी महाराज द्वारा स्थापित Hindaun City का सबसे बड़ा मन्दिर है। यह माता दुर्गा के एक रूप

माता बगलामुखी देवी दर्शन, कथा व महिमा | Mata Baglamukhi Devi Temple Kangra Himachal

Mata Baglamukhi Devi Kangra : माता बगलामुखी देवी दस महाविद्याओं में से एक हैं। यह देवी पीले रंग के वस्त्र धारण करती है इसलिए इन्हें पीताम्बरा भी कहा जाता है। इनकी उपासना वाणी की सिद्धी तथा शत्रुओं पर विजय पाने के लिए की जाती है। माना जाता है कि देवी बगलामुखी

अनोखा शक्तिपीठ है काँगड़ा का बज्रेश्वरी देवी मंदिर | Mata Bajreshwari Devi Temple Kangra

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Kangra Devi Shaktipeeth : हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा कस्बे में स्थित बज्रेश्वरी माता के मंदिर को काँगड़ा देवी के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर माँ दुर्गा के ही एक रूप देवी वज्रेश्वरी को समर्पित है, जहां मात्र हिन्दू भक्त ही नहीं बल्कि मुस्लिम और सिख धर्म के श्रद्धालु भी

गोंदला माता डूंगरपुर Gondala Mata – Dungarpur

Gondala Mata - Dungarpur : राजस्थान के डूंगरपुर जिले में स्थित आदिवासी मीणों की कुलदेवी गोंदला माता का विवरण देते हुए डॉ. रघुनाथ प्रसाद तिवारी अपनी पुस्तक 'मीणा समाज की कुलदेवियां' में लिखते हैं कि "आदिवासी संस्कृति में देवी उपासना आदिकाल से प्रचलित है। इन्ही में गोंदला माता जी का प्राचीन

गुढाचंदरजी की घटवासन माता Ghatwasan Mata Temple Gudhachandar Ji

Ghatwasan Mata Temple Gudhachandar Ji : घटवासन माताजी का धाम राजस्थान के करौली जिले में करौली से लगभग 65 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में  तथा दौसा से लगभग 54 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।  गुढ़ाचन्दरजी नामक स्थान पर विराजित यह धाम अत्यंत रमणीय है। सिन्दूर में लिप्त माँ घटवासन की प्रतिमा के दर्शन पाकर

बीजासणी खुर्रा माता मन्दिर Bijasani Khurra Mata Temple : Lalsot-Mandawari

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बीजासणी खुर्रा माता का मन्दिर राजस्थान में दौसा जिले के लालसोट से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मण्डावरी / मंदवारी से 3 किलोमीटर दक्षिण में स्थित खुर्रा गाँव में है। यह देवी मीणा समाज के डाडरवाल (Dadarwal) व मांदड (Mandad) गोत्र की कुलदेवी है तथा स्थानीय सर्व जन आस्था का

नागाणा की नागणेचिया माता “Nagnechiya Mata- Nagana”

Nagnechiya Mata Temple History in Hindi : राजस्थान के राठौड़ राजवंश की कुलदेवी चक्रेश्वरी, राठेश्वरी,  नागणेची या नागणेचिया के नाम से प्रसिद्ध है । नागणेचिया माता का मन्दिर राजस्थान में जोधपुर जिले के नागाणा गांव में स्थित है। यह मन्दिर जोधपुर से 96 किमी. की दूरी पर है।  प्राचीन ख्यातों

त्रागड सोनी ब्राह्मण समाज का इतिहास व कुलदेवी व्याघ्रेश्वरी माता Tragad Soni History

Tragad Brahmin | Tragad Soni History in Hindi | भगवती लक्ष्मी ने श्रीमालनगर का निर्माण कराकर वहाँ श्रीमाली ब्राह्मण बसाये। उन ब्राह्मणों की पत्नियों के लिए स्वर्णाभूषण बनाने के लिए त्रागड सोनी उत्पन्न किए। उनके लिए स्वर्णाभूषण की कला ही आजीविका का साधन बनी इसलिए वे कलाद भी कहलाए - देव्युवाच -    

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